भोपाल। शिक्षक दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने शिक्षक भर्ती और TET को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट की। विस्तार न्यूज के ग्रुप एडिटर ब्रजेश राजपूत को दिए इंटरव्यू में मंत्री ने शिक्षकों के आंदोलन, भर्ती में पद बढ़ाने की मांग, 72 हजार पदों की दावेदारी और आगामी भर्तियों को लेकर विस्तार से बात की।

मंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं को समझती है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में नियमों और न्यायालय के निर्देशों से हटकर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। वहीं TET के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार पुराने शिक्षकों को दोबारा परीक्षा से राहत दिलाने के पक्ष में रही है।

भर्ती के बीच पद बढ़ाने की मांग पर सरकार का तर्क

शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग पर राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि किसी भर्ती का विज्ञापन निर्धारित पदों के आधार पर जारी किया जाता है। अभ्यर्थी उसी विज्ञापन के अनुसार आवेदन करते हैं और पात्रता पूरी करते हैं।

मंत्री के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद पद बढ़ाने की मांग करने से नई स्थिति पैदा हो जाती है। यदि पुराने विज्ञापन में बाद में पद बढ़ाकर भर्ती कर दी जाती है तो भविष्य में पात्रता हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि विभाग अपने नियमों और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार काम कर रहा है। यदि मौजूदा कानून पद बढ़ाने की अनुमति देता तो सरकार ऐसा करने में पीछे नहीं हटती।

दिग्विजय सिंह से भी हुई भर्ती के मुद्दे पर चर्चा

शिक्षकों के आंदोलन में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शामिल होने को लेकर पूछे गए सवाल पर शिक्षा मंत्री ने बताया कि उनसे भी सरकार की ओर से यही बात कही गई कि नियमों से बाहर जाकर भर्ती प्रक्रिया में बदलाव नहीं किया जा सकता।

मंत्री के अनुसार, चर्चा के दौरान अतिथि शिक्षकों का मुद्दा भी सामने आया। दिग्विजय सिंह की ओर से यह सवाल उठाया गया कि यदि कम खर्च में अतिथि शिक्षक उपलब्ध हो रहे हैं तो नियमित शिक्षक भर्ती क्यों नहीं की जा रही है।

72 हजार पदों की मांग में आरक्षण बना बड़ी वजह

72 हजार पदों पर भर्ती की मांग को लेकर शिक्षा मंत्री ने आरक्षण और बैकलॉग की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि इस आंकड़े में SC और ST के बैकलॉग पद भी शामिल हैं। इन पदों को सामान्य श्रेणी में स्थानांतरित कर भर्ती नहीं किया जा सकता।

मंत्री के अनुसार, संबंधित आरक्षित वर्ग के पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध होने पर ही बैकलॉग पदों को भरा जा सकता है। उनकी जगह किसी अन्य वर्ग के अभ्यर्थी को नियुक्त करने का प्रावधान नहीं है।

इसके अलावा OBC आरक्षण से जुड़ा मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण 13 प्रतिशत हिस्से को फिलहाल अलग रखा जाएगा। इन सभी कानूनी और आरक्षण संबंधी परिस्थितियों के कारण 72 हजार पदों पर एक साथ भर्ती करना संभव नहीं बताया गया है।

18 हजार पदों पर जल्द भर्ती की तैयारी

शिक्षक भर्ती को लेकर मंत्री ने अभ्यर्थियों के लिए अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में जल्द ही करीब 18 हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इस घोषणा से उन अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है जो लंबे समय से नई शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, भर्ती की वास्तविक संख्या और प्रक्रिया आरक्षण व्यवस्था तथा न्यायालय से जुड़े मामलों के अनुसार तय होगी।

TET विवाद पर सरकार शिक्षकों के साथ, लेकिन कोर्ट का आदेश बाध्यकारी

TET परीक्षा को लेकर राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार भी नहीं चाहती कि पुराने नियमों के तहत शिक्षक के रूप में नियुक्त हो चुके शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देने की स्थिति में लाया जाए। उन्होंने कहा कि वह स्वयं शिक्षकों की इस मांग के साथ हैं और सरकार पहले भी इस मुद्दे को उठा चुकी है।

मंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुकी है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद TET को लेकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना सरकार के लिए जरूरी है।

अब ऑफलाइन मोड में भी होगी TET

TET परीक्षा के तरीके को लेकर भी सरकार ने बदलाव का संकेत दिया है। मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री ने फैसला लिया है कि आगामी TET परीक्षा ऑफलाइन मोड में भी आयोजित की जाएगी।

इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है जो ऑनलाइन परीक्षा के बजाय पारंपरिक ऑफलाइन परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक मानते हैं। शिक्षक भर्ती और TET को लेकर सरकार के इन बयानों के बाद अब 18 हजार पदों की प्रस्तावित भर्ती और आगामी TET प्रक्रिया पर अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।

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