केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा है कि माताओं को जागरूक और सशक्त बनाकर बच्चों में कई विकासात्मक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान जागरूकता, नियमित प्रसव पूर्व जांच और अनुशंसित स्क्रीनिंग से कुछ स्थितियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है, जिससे चिकित्सीय सलाह और आवश्यक हस्तक्षेप जल्द शुरू करने में मदद मिलती है। डॉ. जितेंद्र सिंह सक्षम (SAKSHAM) की ओर से आयोजित प्रबुद्ध ‘मातृ शक्ति सम्मेलन’ को संबोधित कर रहे थे, जिसमें रोकी जा सकने वाली दिव्यांगता की रोकथाम और दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण पर जोर दिया गया।

मां होती है बच्चे की जरूरतों को समझने वाली पहली कड़ी

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि माताएं अक्सर बच्चे के विकास या स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को सबसे पहले पहचानती हैं। इसलिए महिलाओं को सही जानकारी और जागरूकता से लैस करना दिव्यांगता की शुरुआती पहचान और समय पर सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मां की जागरूकता से समस्या की पहचान, उचित रेफरल और उपलब्ध चिकित्सा एवं पुनर्वास सेवाओं तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

गर्भावस्था से ही शुरू हो रोकथाम

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रोकी जा सकने वाली दिव्यांगता की रोकथाम का प्रयास बच्चे के जन्म के बाद ही नहीं, बल्कि गर्भावस्था के दौरान ही शुरू हो जाना चाहिए। मातृ स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्रसव पूर्व देखभाल, संक्रमण से बचाव, दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल, नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकों से समय पर परामर्श के प्रति जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान किसी स्थिति की पहचान होने पर समय पर चिकित्सा सहायता और उचित देखरेख से बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

जागरूकता को परिवार और समुदाय तक पहुंचाने पर जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों का अनुभव बताता है कि स्वास्थ्य और सहायता से जुड़ी जागरूकता को परिवार और समुदाय के स्तर तक ले जाना बेहद जरूरी है। महिलाओं की इसमें विशेष भूमिका है। उन्होंने कहा कि जागरूक मां बच्चे की जरूरतों को जल्दी समझ सकती है और आवश्यकता होने पर परिवार को उचित चिकित्सा या सहायता व्यवस्था तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

रोकथाम के साथ दिव्यांगजनों का सशक्तीकरण भी जरूरी

उन्होंने कहा कि जागरूकता का दायरा केवल दिव्यांगता की रोकथाम तक सीमित नहीं होना चाहिए। दिव्यांगजनों को शिक्षा, पुनर्वास, सहायक उपकरण, कौशल विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसरों तक समय पर पहुंच दिलाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण की मजबूत संवाहक बन सकती हैं।

शुरुआती पहचान के लिए अर्ली ट्रीटमेंट सेंटर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार दिव्यांग बच्चों के लिए शुरुआती सहायता व्यवस्था को मजबूत कर रही है। शिशुओं और बच्चों में शुरुआती स्तर पर दिव्यांगता की पहचान और सहायता के लिए देशभर में क्रॉस-डिसएबिलिटी अर्ली ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती पहचान के बाद उचित उपचार, पुनर्वास और सहायता मिलने से बच्चों को अपनी विकासात्मक क्षमताओं को बेहतर ढंग से हासिल करने में मदद मिल सकती है।

खेलों में दिव्यांगजनों के लिए बढ़ रहा इंफ्रास्ट्रक्चर

जितेंद्र सिंह ने दिव्यांगजनों के लिए खेल सुविधाओं के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उत्कृष्ट कोचिंग और व्यवस्थित प्रशिक्षण सहायता उपलब्ध कराने के लिए मध्य प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए भारत का पहला हाई-टेक खेल प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे समर्पित इंफ्रास्ट्रक्चर से खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलता है। इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में भारत के 29 पदकों के रिकॉर्ड प्रदर्शन का भी जिक्र किया।

दिव्यांग बच्चों वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए सुविधाएं

केंद्रीय मंत्री ने दिव्यांग बच्चों वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध विभिन्न सहायता उपायों का भी उल्लेख किया। इनमें रोटेशनल ट्रांसफर से छूट, 22 वर्ष की उम्र तक बच्चों के लिए एजुकेशन अलाउंस, चिकित्सा सुविधाओं के नजदीक पोस्टिंग पर विचार और संबंधित सरकारी नियमों के तहत दो साल की पेड चाइल्ड केयर लीव जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

गर्भावस्था से आत्मनिर्भरता तक मजबूत हो सपोर्ट सिस्टम

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एक प्रभावी सहायता व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो गर्भावस्था और शुरुआती बचपन से लेकर शिक्षा, उपचार, पुनर्वास, कौशल विकास और अंततः आत्मनिर्भरता तक की पूरी यात्रा को कवर करे। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाएं संस्थागत सहायता देती हैं, लेकिन परिवारों और माताओं में लगातार जागरूकता यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है कि बच्चों को सही समय पर इन सुविधाओं का लाभ मिल सके।

सशक्त माताएं बनें समावेशी समाज की नींव

उन्होंने कहा कि प्रबुद्ध ‘मातृ शक्ति सम्मेलन’ का उद्देश्य केवल मौजूदा दिव्यांगजनों की सहायता करना नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक जागरूक और समावेशी समाज की नींव तैयार करना है। उन्होंने कहा कि सशक्त माताएं और जागरूक परिवार शुरुआती रोकथाम, शुरुआती पहचान और व्यापक समावेशन की मजबूत आधारशिला बन सकते हैं।

‘हर मां जागरूक हो, हर परिवार सशक्त बने’

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि हर मां जागरूक हो, हर परिवार सशक्त बने और हर बच्चे को जीवन की बेहतर शुरुआत मिले। उन्होंने कहा कि समाज में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी बच्चा या दिव्यांग व्यक्ति अवसरों से पीछे न छूटे।

राजीव जसरोटिया ने विकास कार्यों की सराहना की

विधायक राजीव जसरोटिया ने मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में कठुआ जिले में व्यापक विकास हुआ है।

सक्षम ने रखी दिव्यांग सशक्तीकरण की पहल

सक्षम (SAKSHAM) के राष्ट्रीय सचिव अभय परगल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने सम्मेलन के उद्देश्य और एजेंडे की जानकारी दी तथा देशभर में दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए संस्था की ओर से चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों के बारे में बताया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और कठुआ क्षेत्र में पहले आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की।

कई प्रमुख लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में राजकीय डिग्री कॉलेज के प्राचार्य स्वामी विश्वानंद, सक्षम की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा खन्ना, अत्री, मनजीत सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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