बलरामपुर। जिले के वनमंडल क्षेत्र में आदिवासी महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) वन धन विकास केंद्र, पतरापारा में वन मंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी की पहल पर महिला स्व-सहायता समूहों के लिए स्थापित महुआ प्रसंस्करण इकाई अंतर्गत रस्सी एवं तेल मिल का शुभारंभ किया गया। इस इकाई का लोकार्पण क्षेत्रीय विधायक उद्देश्वर पैकरा द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप वन क्षेत्रों में लघु वनोपज आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है। इसके तहत आदिवासी समुदायों को स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।

वन धन विकास केंद्र पतरापारा में संचालित इस इकाई के माध्यम से 15 स्व-सहायता समूहों से जुड़े 148 लाभार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। यहां महिलाएं महुआ से तेल निर्माण सहित अन्य प्रसंस्करण कार्य कर सकेंगी, जिससे उनके उत्पादों को स्थानीय बाजारों में बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

अधिकारियों ने बताया कि इस पहल से महिला समूहों की वार्षिक आय में 1.70 लाख से 2.00 लाख रुपये तक की वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही, यह इकाई न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सामाजिक स्तर पर भी महिलाओं को सशक्त बनाएगी।

कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से लघु वनोपज को मूल्य संवर्धन कर बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे आदिवासी परिवारों की आय बढ़ेगी और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला समूह की सदस्याएं, ग्रामीणजन एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक कदम बताया।

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