

पटना | बिहार की नई सरकार के गठन के साथ ही सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। Samrat Chaudhary ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया है, वहीं जेडीयू के खाते से Vijay Kumar Chaudhary और Vijendra Prasad Yadav को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। इस नए समीकरण के बीच सबसे ज्यादा चर्चा विजय चौधरी को लेकर हो रही है।
राजनीति विरासत में मिली, लेकिन संघर्ष से बनाई पहचान
विजय चौधरी का राजनीतिक सफर विरासत से शुरू जरूर हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान मेहनत से बनाई। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बैंक नौकरी से की थी, लेकिन पिता के निधन के बाद राजनीति में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने कांग्रेस से जुड़कर उपचुनाव लड़ा।
कांग्रेस से शुरुआत, हार के बाद बदला रास्ता
साल 1982 में कांग्रेस के साथ राजनीति शुरू करने वाले विजय चौधरी को शुरुआती दौर में सफलता नहीं मिली। विधायक रहते हुए उन्हें पार्टी में सचेतक की जिम्मेदारी भी दी गई, लेकिन लगातार दो चुनाव हारने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया।
जेडीयू में एंट्री के बाद बदली किस्मत
साल 2005 के आसपास उन्होंने Janata Dal United का दामन थामा और यहीं से उनके राजनीतिक करियर ने रफ्तार पकड़ी। 2010 में सरायरंजन विधानसभा सीट से जीत हासिल कर वे विधानसभा पहुंचे और लगातार अपनी पकड़ मजबूत करते गए।
नीतीश कुमार के करीबी, भरोसे का दूसरा नाम
विजय चौधरी को Nitish Kumar का सबसे भरोसेमंद नेता माना जाता है। पिछले दो दशकों से वे उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर राजनीति कर रहे हैं। यही वजह है कि उन्हें विधानसभा अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी महासचिव जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई।
सरकार में अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभाई
नीतीश सरकार के कार्यकाल में विजय चौधरी कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ ने उन्हें जेडीयू का मजबूत स्तंभ बना दिया है।
डिप्टी सीएम बनने के बाद क्या बोले विजय चौधरी
उपमुख्यमंत्री बनने के बाद विजय चौधरी ने कहा कि यह जिम्मेदारी उन्हें Nitish Kumar के भरोसे की वजह से मिली है। उन्होंने साफ कहा कि भले ही नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद पर नहीं हैं, लेकिन वे हमेशा उनके नेता रहेंगे और उनकी नीतियों पर चलते हुए जनता की सेवा करेंगे।
बदलते बिहार में नई जिम्मेदारी, बड़ी चुनौती
अब जब विजय चौधरी उपमुख्यमंत्री बन चुके हैं, तो उनके सामने बिहार के विकास और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी है। आने वाले समय में उनका प्रदर्शन ही तय करेगा कि वे इस नई भूमिका में कितना सफल साबित होते हैं।
































