पटना: बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के लिए नामांकन के अंतिम दिन राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र एवं बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश एमएलसी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल नहीं करेंगे। इसके साथ ही यह भी चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।

जानकारी के अनुसार, भाजपा की ओर से राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विलय का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। माना जा रहा है कि इसी वजह से राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा का अस्तित्व किसी पद के लिए समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पहले भी एनडीए में थी, वर्तमान में भी एनडीए का हिस्सा है और आगे भी गठबंधन में बनी रहेगी।कुशवाहा ने कहा कि कुछ लोग यह समझते हैं कि वह पुत्र मोह में फैसले लेंगे, लेकिन उनके लिए पार्टी और उसके सिद्धांत सर्वोपरि हैं। उन्होंने संकेत दिया कि बेटे के राजनीतिक भविष्य से अधिक महत्वपूर्ण पार्टी का अस्तित्व और संगठन की मजबूती है।

सूत्रों के अनुसार भाजपा को उम्मीद थी कि नई सरकार में बेटे दीपक प्रकाश के मंत्री बनने के बाद उपेंद्र कुशवाहा विलय के प्रस्ताव पर सहमत हो जाएंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। रविवार को पार्टी के एक कार्यक्रम में भी उन्होंने कार्यकर्ताओं के सामने इस बात के संकेत दिए थे।

उपेंद्र कुशवाहा ने यह भी कहा कि वह एनडीए में बने रहेंगे और दीपक प्रकाश भी संवैधानिक प्रावधानों के तहत निर्धारित अवधि तक मंत्री बने रहेंगे। गौरतलब है कि दीपक प्रकाश को मई महीने में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। नियमों के अनुसार मंत्री बने रहने के लिए उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक है।

इधर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने संगठनात्मक चुनावों की भी घोषणा की है। पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष पद का चुनाव 7 जून तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव 13 जून को आयोजित किया जाएगा। 13 जून को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में राष्ट्रीय परिषद की बैठक और पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन भी प्रस्तावित है।

एमएलसी चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन सामने आए इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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