
उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी के लक्ष्य के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रदेश में सक्रिय हैं। इस बार बीजेपी के चुनावी अभियान में मौजूदा सरकार के कामकाज के साथ पिछली समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल को भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक अपने संबोधनों में अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव के शासनकाल का जिक्र कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे बिहार विधानसभा चुनाव में अपनाई गई रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं, जहां एनडीए ने आरजेडी के पुराने शासनकाल को अपने प्रचार का अहम मुद्दा बनाया था।
योगी आदित्यनाथ ने सपा के पुराने कार्यकाल पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कानपुर के बिठूर में आयोजित जनसभा में समाजवादी पार्टी पर हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने पिछली सपा सरकार के दौरान दंगों, भ्रष्टाचार, परिवारवाद और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए।
योगी ने सपा के शासनकाल को अराजकता से जोड़ते हुए जनता से उस दौर को याद रखने की अपील की। उनके भाषण में मौजूदा सरकार और पिछली सरकार के बीच अंतर बताने पर जोर दिखाई दिया।
अमित शाह ने अयोध्या गोलीकांड का किया जिक्र
लखनऊ में बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी समाजवादी पार्टी को निशाने पर लिया। उन्होंने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में कारसेवकों पर हुई पुलिस फायरिंग का उल्लेख किया।
शाह ने अखिलेश यादव से सवाल किया कि वह किस आधार पर दोबारा सरकार बनाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सपा के पुराने शासनकाल को भूली नही है।
प्रचार में पुराने और मौजूदा शासन की तुलना
बीजेपी के प्रचार अभियान में पिछली और वर्तमान सरकार के कार्यकाल की तुलना भी प्रमुखता से सामने आ रही है। पार्टी के पोस्टर और सोशल मीडिया अभियान में अतीक अहमद जैसे माफिया नेताओं, पुराने दंगों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों का उल्लेख किया जा रहा है।
इस रणनीति के जरिए बीजेपी मतदाताओं के सामने अपने शासनकाल और सपा सरकार के दौर का तुलनात्मक चित्र रखने की कोशिश कर रही है।
बिहार चुनाव की रणनीति से जोड़ा जा रहा अभियान
बीजेपी की यूपी चुनावी तैयारी में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणनीति की झलक भी देखी जा रही है। बिहार में एनडीए ने नीतीश कुमार के लंबे शासनकाल के साथ आरजेडी की पिछली सरकारों और उस दौर से जुड़े कथित जंगलराज के आरोपों को प्रचार का हिस्सा बनाया था।
यूपी में भी बीजेपी मौजूदा सरकार के कामकाज के साथ सपा के पुराने कार्यकाल से जुड़े मुद्दों को उठा रही है। बिहार चुनाव में पार्टी की रणनीति से जुड़े रहे विनोद तावड़े को यूपी में भी चुनावी जिम्मेदारी दिए जाने को इस रणनीतिक समानता के संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि, यूपी में इस रणनीति का चुनावी असर क्या होगा, यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल बीजेपी के प्रचार अभियान में पिछली सरकारों का रिकॉर्ड और मौजूदा शासन की तुलना अहम मुद्दे के तौर पर उभर रही है।











