केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 20,000 कृषि उद्यमियों को सशक्त बनाने और 20 लाख किसानों को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से ‘प्रगति’ पहल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि विकसित कृषि क्षेत्र और समृद्ध गांवों के बिना वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता।

कृषि को लाभकारी बनाने पर सरकार का जोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का ध्यान केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती की लागत कम करना, किसानों की आय बढ़ाना, फसल विविधता को बढ़ावा देना और कृषि को अधिक लाभदायक बनाना भी प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए केवल पारंपरिक खेती पर्याप्त नहीं है। इसके लिए मूल्यवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी है।

तकनीक और बाजार से किसानों को जोड़ने की पहल

कृषि मंत्री ने कहा कि ‘प्रगति’ पहल इसी सोच का विस्तार है। इसके माध्यम से किसानों को प्रौद्योगिकी, कृषि मशीनीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बेहतर बाजार पहुंच से जोड़ा जाएगा, जिससे उनकी आय बढ़ाने के नए अवसर तैयार होंगे।

एसबीआई फाउंडेशन और गेट्स फाउंडेशन का सहयोग

अधिकारी के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (एसबीआईएफ) और गेट्स फाउंडेशन सहित कई संस्थानों के सहयोग से तैयार यह कार्यक्रम छोटे किसानों के जीवन स्तर में सुधार के लिए व्यापक, समावेशी और जलवायु-लचीली पुनर्योजी कृषि पहल को गति देगा। यह कार्यक्रम देश के विभिन्न राज्यों में पहले से लागू कृषि-उद्यमिता पहलों से मिली सीख के आधार पर तैयार किया गया है।

कृषि उद्यमियों का राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य

‘प्रगति’ कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में समावेशी भागीदारी और संतुलित प्रतिनिधित्व पर जोर देते हुए 26,000 से अधिक कृषि उद्यमियों के मौजूदा नेटवर्क के अलावा 20,000 नए कृषि उद्यमियों का राष्ट्रव्यापी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है।

किसानों की आजीविका मजबूत करने पर जोर

इस पहल का समर्थन करने वाली संस्था की वरिष्ठ उपाध्यक्ष (वैश्विक सामाजिक प्रभाव) मोनिका बाउर ने कहा कि किसान स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी आजीविका को समर्थन देना मजबूत खाद्य प्रणाली के निर्माण के लिए आवश्यक है। वहीं, जागृत कोटेचा ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ खेती के लिए जरूरी उपकरण और ज्ञान उपलब्ध कराना है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए खाद्य प्रणालियों को और मजबूत बनाया जा सके।

आठ राज्यों में लागू होगा कार्यक्रम

अधिकारी ने बताया कि ‘प्रगति’ पहल मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में लागू की जाएगी।

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