
रायपुर. छत्तीसगढ़ में अगस्त की बारिश ने जलाशयों की तस्वीर काफी हद तक बदल दी है। लगातार हुई बारिश से प्रदेश के बड़े, मध्यम और छोटे बांधों में पानी की आवक बढ़ी है। कई जलाशय पूरी क्षमता तक पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद भी अधिकांश जगहों पर जलभंडारण की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
अगस्त के शुरुआती 15 दिनों में ही प्रदेश के जलाशयों के औसत जलभंडारण में करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 16 अगस्त तक यह आंकड़ा करीब 87 प्रतिशत पहुंच गया है। कोरबा के मिनीमाता बांगो बांध के 9 गेट भी खोले गए हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हुई अच्छी बारिश का असर अब जलाशयों के जलस्तर में साफ नजर आ रहा है।
कई बड़े बांधों में 100 फीसदी पानी, कोडार ने लंबे समय बाद हासिल किया पूरा भराव
वृहद जलाशयों में मुंगेली का मनियारी, बिलासपुर का खारंग और महासमुंद का कोडार बांध अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच चुके हैं। इनमें कोडार बांध की स्थिति खास तौर पर उल्लेखनीय है, क्योंकि कई वर्षों बाद यहां जलभंडारण 100 फीसदी के स्तर तक पहुंचा है।
धमतरी के रविशंकर जलाशय में भी करीब 85 प्रतिशत पानी मौजूद है। कुछ दिन पहले जलाशय का जलस्तर काफी बढ़ने पर यहां से पानी छोड़ा गया था। गंगरेल जलाशय से जुड़े दोनों लिंकिंग डैम में भी जलभराव करीब 88 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
पिछले 15 दिनों में गंगरेल के जलभंडारण में करीब 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सिकासार और दुधावा में भी जलस्तर 95 प्रतिशत से ऊपर पहुंचने के बाद पानी छोड़ा गया था।
बांगो बांध के 9 गेट खुले, जलस्तर पर लगातार रखी जा रही नजर
कोरबा स्थित मिनीमाता बांगो बांध में लगातार पानी की आवक बनी हुई है। जलस्तर बढ़ने के बाद 9 गेट खोलकर पानी बाहर निकाला गया। इसके बावजूद बांध में जलभंडारण करीब 94 प्रतिशत के आसपास बना हुआ है।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बारिश का सिलसिला अनुकूल रहा तो सितंबर तक प्रदेश के जलाशयों में पानी की स्थिति अच्छी रहने की संभावना है। मौजूदा जलभंडारण से अगले वर्ष के लिए भी जल उपलब्धता को लेकर राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पिछले दो साल के मुकाबले इस बार बांधों में सबसे ज्यादा पानी
16 अगस्त तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल प्रदेश के जलाशयों की स्थिति पिछले दो वर्षों से बेहतर है। वर्ष 2024 में इसी तारीख तक औसत जलभंडारण करीब 80 प्रतिशत था। 2025 में यह घटकर करीब 74 प्रतिशत रह गया था।
इस साल बारिश के बेहतर असर से औसत जलभंडारण बढ़कर 87 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यानी 2025 की तुलना में इस बार जलाशयों में पानी की स्थिति करीब 13 प्रतिशत बेहतर है।
मध्यम और छोटे जलाशयों में भी तेजी से सुधरी स्थिति
प्रदेश के मध्यम और लघु जलाशयों में भी बारिश का असर दिखाई दे रहा है। अब ऐसे जलाशयों की संख्या बहुत कम रह गई है, जहां जलभंडारण 50 प्रतिशत से नीचे है।
राजनांदगांव जिले के मोंगरा बैराज में इसका स्पष्ट उदाहरण देखने को मिला। 22 जुलाई तक यहां जलभंडारण शून्य प्रतिशत था, लेकिन बारिश के बाद यह बढ़कर करीब 78 प्रतिशत तक पहुंच गया।
दूसरी ओर कांकेर जिले के मायना जलाशय में अभी स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है। यहां करीब 33 प्रतिशत ही जलभंडारण दर्ज किया गया है। बिलासपुर और राजनांदगांव जिले के कई जलाशय 100 प्रतिशत क्षमता तक पहुंच चुके हैं।
31 जुलाई से 16 अगस्त के बीच कई बांधों में बड़ा बदलाव
31 जुलाई से 16 अगस्त के बीच जलाशयों के जलस्तर में अलग-अलग तरह के बदलाव दर्ज किए गए। मिनीमाता बांगो में जलभंडारण 83.35 से बढ़कर 94.19 प्रतिशत हो गया। गंगरेल में यह 67.82 से बढ़कर करीब 85 प्रतिशत पहुंचा। तांदुला में 66.58 से बढ़कर 74.99 प्रतिशत और मुरूमसिल्ली में 84.33 से बढ़कर 88.98 प्रतिशत जलभंडारण दर्ज किया गया।
कोडार बांध में जलस्तर 87.90 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 100 प्रतिशत हो गया। मनियारी भी 100 प्रतिशत जलभंडारण तक पहुंच गया। खारंग में दोनों तारीखों पर 100 प्रतिशत जलभंडारण दर्ज रहा।
पानी छोड़े जाने से कुछ जलाशयों का स्तर घटा, लेकिन स्थिति फिर भी मजबूत
हर जलाशय में 31 जुलाई से 16 अगस्त के बीच बढ़ोतरी नहीं हुई। जिन बांधों से अतिरिक्त पानी छोड़ा गया, वहां जलस्तर में कमी भी दर्ज की गई।
सोंदूर में जलभंडारण 84.56 से घटकर 80.16 प्रतिशत और दुधावा में 93.59 से घटकर 76.76 प्रतिशत हुआ। सिकासार में भी 93.97 से घटकर 76.74 प्रतिशत जलभंडारण दर्ज किया गया।
इसी तरह केलो बांध में जलभंडारण 40.45 से घटकर 34.33 प्रतिशत रहा, जबकि अरपा भैंसाझार में यह 25.14 से बढ़कर 44.96 प्रतिशत पहुंच गया।
इन आंकड़ों से साफ है कि कुछ बांधों में पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर नीचे आया है, लेकिन प्रदेश के अधिकांश जलाशयों में मौजूदा जलभंडारण की स्थिति पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर बनी हुई है।




















