छत्तीसगढ़ : स्कूली शिक्षा को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यू-डायस (UDISE) की वर्ष 2025-26 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 33 जिलों में कक्षा पहली से 12वीं तक के करीब 3 लाख 69 हजार बच्चों ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी है। इस आंकड़े के सामने आने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।

15 जून तक तैयार होगी सत्यापित सूची

स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को ड्रॉपआउट छात्रों की पहचान और सत्यापन का काम तेज करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का लक्ष्य 15 जून तक ऐसे सभी बच्चों की सत्यापित सूची तैयार करना है, ताकि उनके घर-घर पहुंचकर दोबारा स्कूल में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

31 जुलाई तक स्कूलों में वापसी का लक्ष्य

राज्य सरकार ने इस अभियान के तहत 31 जुलाई तक अधिक से अधिक ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से स्कूलों में दाखिला दिलाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की मदद से विशेष प्रयास किए जाएंगे।

बिलासपुर में सबसे ज्यादा ड्रॉपआउट छात्र

रिपोर्ट के अनुसार ड्रॉपआउट छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा बिलासपुर जिले में दर्ज की गई है, जहां 32,718 बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद रायपुर में 32,023 और दुर्ग जिले में 20,648 छात्र-छात्राओं के स्कूल छोड़ने का मामला सामने आया है। इन आंकड़ों ने शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने पर फोकस

शिक्षा विभाग का मानना है कि आर्थिक कारण, पारिवारिक जिम्मेदारियां, पलायन और अन्य सामाजिक परिस्थितियां बच्चों के स्कूल छोड़ने की प्रमुख वजह हो सकती हैं। ऐसे में अभियान के दौरान सिर्फ दाखिला ही नहीं, बल्कि बच्चों के नियमित रूप से स्कूल आने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर ड्रॉपआउट छात्रों की संख्या शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। यदि इन बच्चों को समय रहते दोबारा स्कूलों से नहीं जोड़ा गया, तो उनके भविष्य और राज्य की साक्षरता दर पर भी असर पड़ सकता है। इसी कारण शिक्षा विभाग इस अभियान को मिशन मोड में संचालित करने की तैयारी कर रहा है।

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