

बलरामपुर: कभी बारिश के भरोसे खेती करने वाले किसानो को मनरेगा अंतर्गत तालाब गहरीकरण से अब वर्षभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है।जनपद पंचायत शंकरगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत डिपाडीहकला के गांव का पुरैन तालाब, जो पहले बरसात के बाद धीरे-धीेरे सूख जाता था, अब पूरे साल पानी से भरा रहता है। मनरेगा अंतर्गत किए गए तालाब गहरीकरण पुरैन तालाब कार्य ने न केवल गांव की जल समस्या को कम किया है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन में नई उम्मीद और खुशहाली भी लाई है।
लगभग 9 लाख 8 हजार रुपये की लागत से पूर्ण हुए इस कार्य में श्रम मद से 8 लाख 54 हजार रुपये तथा सामग्री मद से 54 हजार रुपये व्यय किया गया। कार्य के दौरान कुल 1044 मानव-दिवस सृजित किए गए जिससे तालाब गहरीकरण के दौरान गांव के श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हुआ। इससे ग्रामीणों को अपने गांव में ही काम मिला और पलायन की समस्या में भी कमी आई।
डिपाडीहकला के किसान बताते हैं कि पहले खेती पूरी तरह बारिश और कुओं के सीमित पानी पर निर्भर थी। बरसात कम होने पर खेत सूख जाते थे और रबी फसल लेना मुश्किल हो जाता था। पशुओं के लिए भी गर्मियों में पानी की समस्या बनी रहती थी। लेकिन अब तालाब गहरीकरण के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। वर्षा का पानी तालाब में संग्रहित हो रहा है और लंबे समय तक पानी उपलब्ध रहने से किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा मिल रही है।
तालाब के आसपास लगभग 9 एकड़ भूमि में खेती करने वाले 12 हितग्राहियों को सीधे तौर पर लाभ मिल रहा है। अब ग्रामीण खरीफ के साथ रबी फसल की खेती भी कर पा रहे हैं, जिससे उनकी आय बढ़ने की उम्मीद जगी है।
पहले गर्मी के दिनों में पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना सबसे बड़ी चिंता होती थी। अब तालाब में सालभर पानी रहने से पशुओं को आसानी से पानी मिल रहा है और गांव में जल संकट की समस्या भी काफी हद तक कम हुई है।
कार्य की स्वीकृति के बाद तकनीकी सहायक द्वारा ले-आउट देकर नियमानुसार कार्य प्रारंभ कराया गया। निर्माण कार्य की सतत निगरानी की गई जिससे तालाब का स्वरूप बेहतर हुआ और जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि हुई।मनरेगा अंतर्गत किए जा रहे ऐसे कार्य ग्रामीण विकास और जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर के नेतृत्व में जिले में जल संरक्षण आधारित कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि किसानों को स्थायी लाभ मिल सके और डिपाडीहकला का पुरैन तालाब जलस्रोत नहीं, बल्कि ग्रामीणों की नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया है।





















