नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बीएसएफ के एक कर्मचारी के खिलाफ दहेज हत्या के मामले में दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद कर दी।कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए उसके खिलाफ कार्यवाही जारी रखना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

जस्टिस संजय करोल और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कर्मचारी की अपील स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिसंबर 2025 के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने से इनकार किया गया था।मामला वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश के मेरठ में दर्ज हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उस प्रमाण पत्र पर गौर किया, जिसे बीएसएफ बटालियन के कमांडेंट ने जारी किया था। इसमें कहा गया था कि घटना से संबंधित अवधि में अपीलकर्ता आधिकारिक ड्यूटी पर था और मेरठ से बाहर सरकारी कार्य के लिए तैनात था।

पीठ ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले में आरोपित बनाए गए कर्मचारी के माता-पिता को ट्रायल कोर्ट पहले ही मुकदमे की सुनवाई के बाद बरी कर चुका था।अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह स्पष्ट नहीं कर सका कि यदि मृतका की हत्या आरोपितों ने की थी तो वह कमरा और मुख्य दरवाजा अंदर से बंद क्यों था। इन परिस्थितियों को देखते हुए पीठ ने माना कि कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं होगा।

कर्मचारी की शादी अप्रैल 2014 में हुई थी। जून 2016 में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि उसने और उसके परिवार के सदस्यों ने दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित किया, जिसके कारण उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी (दहेज हत्या) और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के तहत मामला दर्ज किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि स्पष्ट किया कि एफआईआर या आपराधिक कार्यवाही रद करने की शक्ति का इस्तेमाल सीमित मामलों में और बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए। इस मामले के विशेष तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने मेरठ की अदालत में कर्मचारी के खिलाफ चल रही सभी कार्यवाहियां समाप्त कर दीं।

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