

पश्चिम बंगाल : राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए नेताओं के नए राजनीतिक समूह की बैठक के बाद अंदरूनी मतभेदों की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसकी वजह कुछ प्रमुख सांसदों का बैठक में शामिल नहीं होना बताया जा रहा है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
तीन सांसदों की अनुपस्थिति से उठे सवाल
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जंगीपुर से सांसद खालिलुर रहमान, मुर्शिदाबाद से सांसद अबू ताहेर खान और बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान बैठक में मौजूद नहीं थे। इससे पहले भी ये सांसद एनडीए से जुड़ी एक बैठक में शामिल नहीं हुए थे। लगातार दूसरी बार अनुपस्थित रहने के बाद नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
एनडीए के साथ जाने पर अभी तस्वीर साफ नहीं
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नए राजनीतिक समूह के सभी सांसद एनडीए के साथ आगे बढ़ने के मुद्दे पर एकमत नहीं हैं। हालांकि इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल इन चर्चाओं को केवल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
वोटरों के दबाव की भी हो रही चर्चा
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह भी चर्चा है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले कुछ सांसद अपने क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों और मतदाताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सावधानी से कदम बढ़ा रहे हैं। हालांकि इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अबू ताहेर खान ने दी अपनी सफाई
सांसद अबू ताहेर खान ने बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर स्पष्ट किया है कि उनकी अनुपस्थिति का किसी नए राजनीतिक फैसले या गठबंधन से संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि वे एनडीए का हिस्सा नहीं हैं और उनकी गैरमौजूदगी को किसी नए राजनीतिक संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
आगे के घटनाक्रम पर टिकी राजनीतिक नजरें
इस बीच लोकसभा में नए राजनीतिक समूह को अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता मिलने का मामला भी लंबित बताया जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस राजनीतिक दल की रणनीति क्या होगी और उसके नेता किस दिशा में आगे बढ़ेंगे, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।











