धमतरी। राजनीतिक मंचों पर जहां अक्सर आरोप-प्रत्यारोप और सियासी बयानबाजी देखने को मिलती है, वहीं धमतरी जिले के ग्राम छाती में आयोजित चंद्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज के महाधिवेशन में एक ऐसा पल सामने आया जिसने पूरे कार्यक्रम का माहौल खुशनुमा बना दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कुरुद विधायक अजय चंद्राकर की आत्मीय मुलाकात ने न केवल लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नई चर्चा छेड़ दी।

समाज के आग्रह पर मंच पर हुई खास ‘समधी मुलाकात’

महाधिवेशन के दौरान समाज के लोगों ने मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधायक अजय चंद्राकर से कहा कि दोनों नेताओं के बीच समधी का रिश्ता है, ऐसे में एक ‘समधी भेंट’ तो बनती है। लोगों की इस मांग पर दोनों नेताओं ने भी पूरे अपनत्व के साथ प्रतिक्रिया दी।

मुख्यमंत्री साय ने अजय चंद्राकर के कंधे पर हाथ रखा और दोनों ने साथ में तस्वीर खिंचवाई। यह दृश्य देखते ही कार्यक्रम स्थल तालियों और मुस्कुराहटों से गूंज उठा। मंच पर मौजूद लोगों ने भी इस पल का भरपूर आनंद लिया।

क्या है ‘समधी’ रिश्ते की पूरी कहानी?

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वयं इस रिश्ते की पृष्ठभूमि साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का विवाह धमतरी जिले के परसवानी गांव में हुआ है, जिससे उनका इस क्षेत्र से पारिवारिक जुड़ाव है।

वहीं विधायक अजय चंद्राकर पहले भी सार्वजनिक मंचों पर बता चुके हैं कि जिला पंचायत सदस्य टीकाराम कंवर उनके गुरु भाई हैं। मुख्यमंत्री की बेटी का विवाह टीकाराम कंवर के परिवार में हुआ है। इसी पारिवारिक संबंध के कारण अजय चंद्राकर मुख्यमंत्री को स्नेहपूर्वक ‘समधी महाराज’ कहकर संबोधित करते हैं।

सोशल मीडिया पर भी दिखी रिश्तों की मिठास

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अजय चंद्राकर ने मुख्यमंत्री के साथ ली गई तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। पोस्ट में उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को स्नेहपूर्वक ‘समधी जी’ कहकर संबोधित किया।

इस पर मुख्यमंत्री ने भी गर्मजोशी भरा जवाब देते हुए लिखा कि अजय जी का यह आत्मीय संबोधन उन्हें हमेशा विशेष महसूस कराता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल राजनीति नहीं, बल्कि रिश्तों, संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों से भी है।

सियासी अटकलों के बीच मिला सकारात्मक संदेश

राजनीतिक जानकारों की नजर में यह मुलाकात इसलिए भी खास रही क्योंकि पिछले कुछ समय से दोनों नेताओं के संबंधों को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही थीं। ऐसे माहौल में मंच पर दिखी सहजता, आपसी सम्मान और सोशल मीडिया पर हुआ दोस्ताना संवाद कई अटकलों पर विराम लगाने वाला माना जा रहा है।

एक तस्वीर से आगे बढ़कर बना सामाजिक सौहार्द का संदेश

‘समधी भेंट’ का यह प्रसंग केवल एक फोटो अवसर तक सीमित नहीं रहा। इसने छत्तीसगढ़ की सामाजिक संस्कृति, पारिवारिक रिश्तों की गरिमा और आपसी आत्मीयता की झलक भी पेश की। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे यादगार पल बताते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में ऐसे दृश्य समाज को सकारात्मक संदेश देते हैं और रिश्तों की अहमियत को और मजबूत करते हैं।

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