

मास्टरमाइंड समेत 4 गिरफ्तार, डोंगरगढ़ और बलरामपुर से जारी हुए 20-25 संदिग्ध प्रमाण पत्रों की जांच
बलरामपुर। छत्तीसगढ़ राज्य का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में भर्ती कराने वाले एक संगठित गिरोह का बलरामपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में मुख्य आरोपी सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि अन्य राज्यों के युवकों को छत्तीसगढ़ का निवासी दर्शाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्थानीय निवास प्रमाण पत्र जारी कराए गए, जिनका उपयोग केंद्रीय सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए किया गया।
जानकारी के अनुसार,तहसीलदार बलरामपुर ने थाना कोतवाली बलरामपुर में लिखित शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत में बताया गया कि 204 कोबरा बटालियन सीआरपीएफ करनपुर, जगदलपुर में पदस्थ कांस्टेबल सुमित पिता अचल सिंह द्वारा विशाल सोनी के शैक्षणिक एवं अन्य दस्तावेजों में कूटरचना कर अपने नाम से संशोधन कराया गया तथा ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर प्रमाण पत्र जारी कराया गया।प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने पर पुलिस ने आरोपी सुमित सिंह एवं अन्य आरोपियों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 318(2), 319(2), 336(3), 338, 340(2), 61(2)(ए) तथा आईटी एक्ट की धारा 66(सी) और 66(डी) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की।
विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी सुमित सिंह, निवासी ग्राम रूंध, जिला धौलपुर (राजस्थान), छत्तीसगढ़ का निवासी नहीं है। इसके बावजूद उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर छत्तीसगढ़ का स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र प्राप्त किया और वर्ष 2023 में एसएससी के माध्यम से सीआरपीएफ में भर्ती हो गया। पुलिस ने 14 मई 2026 को आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को पता चला कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के निवासी विवेक सिंह तोमर द्वारा किया जा रहा था। विवेक सिंह तोमर गैर-निवासी व्यक्तियों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर छत्तीसगढ़ के विभिन्न तहसील कार्यालयों से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करवाता था।पुलिस ने 22 मई को विवेक सिंह तोमर और उसके सहयोगी आकाश शर्मा को रायपुर से हिरासत में लिया और 23 मई को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि विवेक सिंह तोमर ने स्वयं भी डोंगरगढ़ क्षेत्र से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर छत्तीसगढ़ का स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र बनवाया था।

वहीं सहआरोपी आकाश शर्मा ने अपना नाम बदलकर "तुकेश्वर पिता भोजराम" दर्शाया और बलरामपुर निवासी होने का फर्जी दावा किया। उसने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार किए। साथ ही दीपक चौरसिया नामक व्यक्ति के शैक्षणिक दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर उन्हें अपने उपयोग में लिया और बलरामपुर तहसील कार्यालय से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया।तकनीकी विशेषज्ञ की भूमिका भी आई ।प्रकरण की विवेचना में एक और अहम आरोपी ओमप्रकाश चंद्रवंशी का नाम सामने आया। पुलिस ने उसे 27 मई को राजनांदगांव जिले से हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया।
पूछताछ में ओमप्रकाश ने बताया कि उसे विवेक सिंह तोमर द्वारा अन्य राज्यों के व्यक्तियों के नाम से छत्तीसगढ़ का निवासी प्रमाण पत्र बनवाने का काम दिया जाता था। वह ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल में सिटीजन आईडी बनाकर संबंधित व्यक्तियों के दस्तावेज डाउनलोड करता, उनमें एडिटिंग कर नाम और अन्य जानकारियां बदलता तथा फिर ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करवाता था।इस काम के लिए वह प्रति व्यक्ति 4 से 5 हजार रुपये लेता था। पुलिस ने उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त कंप्यूटर सिस्टम भी जब्त किया है।एक प्रमाण पत्र के बदले 3 से 4 लाख रुपये तक वसूली जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह का मुख्य आरोपी विवेक सिंह तोमर फर्जी स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र बनवाने के बदले प्रत्येक व्यक्ति से 3 से 4 लाख रुपये तक वसूलता था। गिरोह का मुख्य उद्देश्य अन्य राज्यों के युवकों को छत्तीसगढ़ का निवासी दिखाकर केंद्रीय सुरक्षा बलों की भर्ती प्रक्रिया में लाभ दिलाना था।
पुलिस के अनुसार केंद्रीय सुरक्षा बलों की भर्ती में छत्तीसगढ़ राज्य का कटऑफ कई बार अन्य राज्यों की तुलना में कम रहता है। इसी का फायदा उठाने के लिए बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों ने फर्जी निवास प्रमाण पत्रों का सहारा लिया।विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि बलरामपुर तहसील कार्यालय के अलावा डोंगरगढ़ तहसील कार्यालय से भी लगभग 20 से 25 ऐसे स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी कराए गए हैं, जिनमें फर्जीवाड़े की आशंका है। पुलिस को संदेह है कि इन प्रमाण पत्रों का उपयोग कर कई गैर-निवासी अभ्यर्थी सीआरपीएफ, एसएसबी और सीआईएसएफ जैसे केंद्रीय सुरक्षा बलों में भर्ती हो चुके हैं या भर्ती होने का प्रयास कर रहे हैं।
बलरामपुर पुलिस ने बताया कि संदिग्ध प्रमाण पत्रों और उनसे लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों की पहचान की जा रही है। संबंधित केंद्रीय सुरक्षा बलों से पत्राचार कर आवश्यक जानकारी जुटाई जाएगी तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।पुलिस की इस कार्रवाई को भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा करने वाले संगठित नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी तथा नए खुलासे होने की संभावना है।





















