नई दिल्ली: एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की मंजूरी देने का मुद्दा राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मस्क के बीच सोशल मीडिया पर हुई बयानबाजी के बाद केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सरकार का पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए लाइसेंस और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत पूरी की जाएगी।

सिंधिया ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को खुद स्पष्ट नहीं है कि वह किस दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।

सैटेलाइट इंटरनेट के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस

ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुताबिक, भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन यानी सैटकॉम सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। हालांकि, लाइसेंस हासिल करने के बाद भी कंपनियां तत्काल सेवाएं शुरू नहीं कर सकतीं। इसके लिए उन्हें अन्य आवश्यक मंजूरियां और सुरक्षा संबंधी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

स्पेक्ट्रम आवंटन भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। सरकार की ओर से शुल्क तय होने और संबंधित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही कंपनियां इस दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।

राहुल गांधी और एलन मस्क के बीच क्यों हुई चर्चा?

स्टारलिंक को भारत में प्रवेश की अनुमति देने का विषय सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहा। इस दौरान ऐसे आरोप सामने आए कि देश में प्रभावशाली कारोबारी समूहों के हितों को प्राथमिकता देने के कारण एलन मस्क की कंपनी के लिए मुश्किलें खड़ी की जा रही हैं।

इसी विवाद के बीच राहुल गांधी और मस्क की प्रतिक्रियाओं ने राजनीतिक बहस को और चर्चा में ला दिया। हालांकि, किसी कंपनी को लाइसेंस या स्पेक्ट्रम देने का फैसला संबंधित नियमों, तकनीकी जरूरतों और सुरक्षा मानकों के आधार पर किया जाना है।

सिंधिया ने कांग्रेस के रुख पर उठाए सवाल

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के रुख में बदलाव का आरोप लगाते हुए पार्टी पर निशाना साधा। उनके अनुसार, पहले कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए जा रहे थे कि संबंधित कंपनी को लाइसेंस क्यों नहीं दिया गया। अब इसी विषय पर पार्टी की प्रतिक्रिया अलग नजर आ रही है।

सिंधिया की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के विस्तार और बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चा जारी है।

भारत में स्टारलिंक की सेवाएं कब शुरू होंगी?

स्टारलिंक सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट उपलब्ध कराने वाली कंपनी है। इसकी तकनीक उन क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है, जहां पारंपरिक इंटरनेट नेटवर्क पहुंचाना कठिन होता है।

भारत में सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनी को लाइसेंस के अलावा लागू नियामकीय शर्तों, सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसलिए केवल लाइसेंस मिलने के आधार पर सेवा शुरू होने की तारीख तय नहीं मानी जा सकती।

आगे क्या होगा?

अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू नियामकीय मंजूरियों और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया है। सरकार की ओर से निर्धारित शर्तें पूरी होने के बाद ही संबंधित कंपनियां अपनी सेवाओं के संचालन की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।

फिलहाल, स्टारलिंक को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के साथ भारत में सैटेलाइट इंटरनेट बाजार के विस्तार पर भी नजर बनी हुई है।

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