
दिल्ली : जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को सत्येंद्र जैन समेत पांच आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अदालत ने जैन की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया था।
3 सितंबर को होगी अगली पेशी
अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपियों को अगली बार 3 सितंबर को सुबह 11 बजे पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश दिल्ली एंटी करप्शन ब्रांच की मांग पर दिया गया।वहीं आरोपी अंकित श्रीवास्तव को अदालत ने दो दिन की रिमांड पर भेजा है। दूसरी ओर सत्येंद्र जैन समेत चार आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर 25 अगस्त को सुनवाई होगी।
इन आरोपियों को भेजा गया जेल
सत्येंद्र जैन के अलावा न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपियों में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय, एएन इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवॉयरमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा और सृजनहार के प्रोपराइटर पंकज वर्मा शामिल हैं।उदित प्रकाश राय की जमानत याचिका पर 20 अगस्त 2026 को अलग से सुनवाई होने वाली है।
क्या है दिल्ली जल बोर्ड टेंडर मामला
एंटी करप्शन ब्रांच के अनुसार इस मामले में 11 मई 2024 को FIR दर्ज की गई थी। जांच में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अलावा धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।जांच एजेंसी का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से संबंधित टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी शर्तों और उपकरणों के स्पेसिफिकेशन में बदलाव किए गए। आरोप है कि इन बदलावों का फायदा एक विशेष तकनीक उपलब्ध कराने वाली कंपनी यूरोटेक एनवॉयरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को मिला।
गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
सत्येंद्र जैन ने अदालत में अपनी गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी थी। उनका पक्ष था कि पुलिस की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। हालांकि अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार नहीं की और गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने से इनकार कर दिया।अब मामले में अगली अहम सुनवाई जमानत याचिकाओं पर होगी। अदालत के फैसले के बाद यह साफ होगा कि सत्येंद्र जैन और अन्य आरोपियों को आगे राहत मिलती है या उन्हें न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा।




















