
पटना: बिहार विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव को लेकर महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। राजद की ओर से पहले ही छह सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा किए जाने के बाद कांग्रेस ने भी पांच निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम जारी कर दिए हैं। इनमें तीन सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवार आमने-सामने होंगे।
कांग्रेस की ओर से जारी सूची को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी मिली है। पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. मदन मोहन झा, कोसी स्नातक से मनोज कुमार जायसवाल, दरभंगा स्नातक से रजनीकांत पाठक, पटना शिक्षक से डॉ. संजय यादव और पटना स्नातक से डॉ. असदुल्लाह खान को उम्मीदवार बनाया है। इनमें कोसी स्नातक, दरभंगा स्नातक और पटना स्नातक सीटों पर राजद पहले ही अपने उम्मीदवार उतार चुका है। वहीं दरभंगा शिक्षक और पटना शिक्षक सीट पर फिलहाल कांग्रेस और राजद के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला नहीं है। राजद ने दरभंगा शिक्षक सीट पर अभी अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
राजद ने छह सीटों पर पहले ही घोषित किए थे उम्मीदवार
राजद ने सितंबर में विधान परिषद की आठ सीटों में से छह पर प्रत्याशियों की घोषणा की थी। पार्टी ने पटना शिक्षक सीट से डॉ. संजीव कुमार सिंह, पटना स्नातक से दिलीप कुमार, कोसी स्नातक से नितेश कुमार, दरभंगा स्नातक से अनिल कुमार झा, सारण शिक्षक से प्रो. जयराम यादव और तिरहुत स्नातक से डॉ. रश्मि विनायक गौतम को उम्मीदवार बनाया था।इसके बाद कांग्रेस की नई सूची से कोसी स्नातक, दरभंगा स्नातक और पटना स्नातक सीटों पर दोनों सहयोगी दलों के प्रत्याशी आमने-सामने आ गए हैं।
सीटों को लेकर पहले से थी नाराजगी
कांग्रेस की ओर से पहले यह नाराजगी सामने आई थी कि राजद ने उम्मीदवारों की घोषणा से पहले पार्टी से सीटों को लेकर पर्याप्त बातचीत नहीं की। इसी बीच कांग्रेस के बिहार नेतृत्व की ओर से पार्टी आलाकमान को विधान परिषद चुनाव अलग लड़ने का प्रस्ताव दिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं।बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव 23 अक्टूबर 2026को होना है। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर, नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर निर्धारित है। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। ऐसे में एमएलसी चुनाव में राजद और कांग्रेस के बीच उम्मीदवारों का आमने-सामने आना गठबंधन की मौजूदा स्थिति पर सवाल जरूर खड़े करता है, लेकिन इसे फिलहाल पूरे राजनीतिक गठबंधन के औपचारिक टूटने की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा सकता। चुनावी मैदान में दोनों दलों की अलग-अलग दावेदारी ने बिहार की सियासत में जरूर नई हलचल पैदा कर दी है।




















