

कर्नाटक : श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव के करीब तीन साल बाद पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती ने नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। Karnataka High Court के निर्देश पर हुई इस प्रक्रिया के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखा टकराव सामने आ गया है।
BJP उम्मीदवार का दावा, अब 56 वोटों से आगे
भाजपा उम्मीदवार D. N. Jeevaraj ने दावा किया है कि दोबारा गिनती के बाद वे 56 वोटों से आगे हो गए हैं। उन्होंने पहले ही अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कई पोस्टल बैलेट गलत तरीके से खारिज कर दिए गए थे, जिससे परिणाम प्रभावित हुआ।
कांग्रेस का पलटवार, ‘सुनियोजित साजिश’ का आरोप
दूसरी ओर कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे ‘सुनियोजित अपराध’ करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है।
मूल नतीजा बेहद करीबी, अब गिनती ने बदली तस्वीर
मूल चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार T. D. Rajegowda ने यह सीट महज 201 वोटों के अंतर से जीती थी। भाजपा का तर्क था कि करीब 300 पोस्टल बैलेट गलत तरीके से खारिज किए गए, जो जीत के अंतर से ज्यादा थे।
दोबारा गिनती में बड़ा बदलाव, वोटों में आया अंतर
हाई कोर्ट के आदेश के बाद खारिज किए गए 279 पोस्टल बैलेट की समीक्षा की गई। कुल 1,822 पोस्टल वोटों में से 1,543 वोटों की दोबारा गिनती हुई।
इस प्रक्रिया में कांग्रेस उम्मीदवार के वोट 569 से घटकर 314 रह गए, यानी 255 वोटों की कमी आई। वहीं भाजपा उम्मीदवार के वोट 692 से घटकर 690 हुए। इस नई गिनती के आधार पर भाजपा ने बढ़त का दावा किया है।
अभी अंतिम फैसला बाकी, चुनाव आयोग पर टिकी नजर
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बावजूद अभी तक कोई आधिकारिक अंतिम नतीजा घोषित नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि अदालत ने केवल गिनती और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था, अंतिम परिणाम घोषित करना उनका अधिकार नहीं है।
आरोप-प्रत्यारोप तेज, दोनों दलों में बढ़ा तनाव
भाजपा ने कांग्रेस पर अधिकारियों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है, वहीं कांग्रेस ने पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर डालने वाली साजिश बताया है।
अब सबकी नजर चुनाव आयोग पर, फैसला तय करेगा सियासी दिशा
इस पूरे विवाद के बीच अब अंतिम निर्णय चुनाव आयोग के हाथ में है। जैसे ही आधिकारिक परिणाम सामने आएगा, यह स्पष्ट होगा कि श्रृंगेरी सीट पर किसकी जीत कायम रहती है और इस सियासी घमासान का अंत कैसे होता है।

































