छत्तीसगढ़ : लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और मौतों के आंकड़ों पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने कड़ी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि दुर्घटनाओं के आंकड़े बेहद भयावह हैं और सड़क सुरक्षा को केवल औपचारिकता बनाकर नहीं छोड़ा जा सकता। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के क्षेत्रीय अधिकारी को शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

17 महीनों में 22 हजार से ज्यादा हादसे, 10 हजार से अधिक लोगों की मौत

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच के समक्ष प्रस्तुत कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से 31 मई 2026 तक राज्य में 22,375 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। इन हादसों में 10,137 लोगों की जान गई, जबकि 18,897 लोग घायल हुए।इन आंकड़ों पर चिंता जताते हुए अदालत ने कहा कि यह स्थिति बेहद गंभीर है और प्रभावी कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता है।

जिला सड़क सुरक्षा समितियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

हाई कोर्ट ने जिला सड़क सुरक्षा समितियों के कामकाज पर भी सवाल खड़े किए। अदालत ने विशेष रूप से सरगुजा जिले का उल्लेख करते हुए नाराजगी जताई, जहां पूरे अवधि में समिति की केवल एक बैठक आयोजित की गई। कोर्ट ने कहा कि ऐसी समितियों का उद्देश्य केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना होना चाहिए।

10 ब्लैक स्पॉट पर तत्काल सुधार के निर्देश

डिवीजन बेंच ने राज्य के चिन्हित 10 ब्लैक स्पॉट पर बिना देरी किए इंजीनियरिंग सुधार और आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि दुर्घटनाओं की संख्या कम की जा सके।

सड़क परियोजनाओं की प्रगति की भी हुई समीक्षा

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने अदालत को बताया कि सीपत-बलौदा-कोरबा राष्ट्रीय राजमार्ग-130ए के निर्माण का कार्य 15 मई 2026 से शुरू हो चुका है और इसे 12 महीने में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।इसके अलावा अंबिकापुर-राजपुर मार्ग परियोजना पर भी निर्माण कार्य जारी होने की जानकारी अदालत को दी गई।

हाई कोर्ट ने कहा- न्यायिक निगरानी जारी रहेगी

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़क परियोजनाओं का निर्माण समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा होने तक अदालत इस पूरे मामले की न्यायिक निगरानी जारी रखेगी।मुख्य सचिव और एनएचएआई को ब्लैक स्पॉट सुधार, जिला सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकों, सड़क हादसों की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत शपथपत्र 6 अगस्त तक अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

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