
इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर से मेडिकल कॉलेज में पीजी डॉक्टर के काम के दबाव से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। एमजीएम कॉलेज में पीजी प्रथम वर्ष की जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर सिमी यादव ने इंसुलिन का इंजेक्शन लगाकर अपनी जान लेने की कोशिश की। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।परिवार ने इस घटना के पीछे सीनियर डॉक्टरों की ओर से कथित मानसिक प्रताड़ना और जरूरत से अधिक ड्यूटी कराने का आरोप लगाया है। परिजनों का यह भी दावा है कि डॉक्टर से चिकित्सा कार्य के अलावा अन्य काम भी कराए जाते थे।
192 घंटे की जगह 392 घंटे ड्यूटी कराने का आरोप
परिजनों के मुताबिक पीजी डॉक्टरों के लिए निर्धारित कार्य अवधि करीब 192 घंटे प्रतिमाह बताई गई है, लेकिन सिमी यादव से कथित तौर पर एक महीने में 392 घंटे तक काम कराया गया। परिवार का आरोप है कि प्रशिक्षण के शुरुआती दौर में उनसे लगातार 36-36 घंटे की ड्यूटी कराई जाती थी।इसके बाद उनके लिए 12 घंटे का रोस्टर जारी किया गया। परिजनों का कहना है कि लगातार लंबे समय तक काम करने के कारण सिमी पर काम का दबाव बढ़ता गया।
36 घंटे की शिफ्ट में वॉशरूम जाने पर भी पूछताछ का आरोप
परिवार ने आरोप लगाया है कि जूनियर डॉक्टरों को ड्यूटी रूम का पर्याप्त इस्तेमाल करने का मौका नहीं मिलता था। उनका दावा है कि 36 घंटे की लगातार शिफ्ट के दौरान डॉक्टर के वॉशरूम जाने पर भी उनसे पूछा जाता था कि वह कहां गई थीं।परिजनों के अनुसार इन परिस्थितियों को लेकर सिमी मानसिक तनाव में थीं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
फरवरी में लिया था पीजी में दाखिला
जानकारी के मुताबिक सिमी यादव ने 14 फरवरी को गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में पीजी प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई उज्जैन स्थित आरडी गार्गी मेडिकल कॉलेज से की थी।
शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं होने का आरोप
परिवार का कहना है कि सिमी ने कथित कार्य दबाव और अन्य समस्याओं को लेकर कॉलेज प्रबंधन से शिकायत भी की थी। आरोप है कि शिकायत के बावजूद मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई।इस मामले को लेकर कोर्ट की ओर से एमजीएम कॉलेज को नोटिस भी जारी किया गया था। परिवार के मुताबिक अब तक नोटिस का जवाब नहीं दिया गया है।
मामले की जांच के लिए बनाई जाएगी कमेटी
घटना सामने आने के बाद अब मामले की जांच के लिए कमेटी गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। कमेटी पीजी डॉक्टर की ड्यूटी, काम के घंटे, शिकायतों और लगाए गए अन्य आरोपों की जांच करेगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।




















