
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन निर्धारण (पे-फिक्सेशन) में गलतियों को रोकने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पदोन्नति, वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) या एसीपी/एमएसीपी का लाभ मिलने के बाद जारी पे-फिक्सेशन आदेशों का सत्यापन तीन महीने के भीतर या संबंधित वित्त वर्ष की समाप्ति तक पूरा करना होगा।
नियमों के पालन में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। इसका उद्देश्य वेतन निर्धारण में पारदर्शिता बनाए रखना और भविष्य में पेंशन की गणना से जुड़ी विसंगतियों को रोकना है।
सत्यापन के बाद कर्मचारियों से नहीं होगी वसूली
प्रावधानों के अनुसार, पे एंड अकाउंट्स ऑफिस (PAO) की ओर से सत्यापन प्रमाणपत्र जारी होने के बाद संबंधित कर्मचारी से वेतन निर्धारण की गड़बड़ी के आधार पर वसूली नहीं की जा सकेगी। यदि प्रमाणपत्र जारी होने के बाद भी पे-फिक्सेशन में गलती सामने आती है, तो उससे हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
पेंशन रिकॉर्ड का भी होगा समय-समय पर ऑडिट
पेंशन की गणना में किसी तरह की त्रुटि न हो, इसके लिए कर्मचारियों की सेवा अवधि (सर्विस पीरियड) से जुड़े रिकॉर्ड का समय-समय पर ऑडिट किया जाएगा। इससे पेंशन निर्धारण में पारदर्शिता बढ़ाने और भुगतान संबंधी गड़बड़ियों को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।
3.46 लाख करोड़ रुपये रहा केंद्र का पेंशन खर्च
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार का कुल पेंशन खर्च 12.3 प्रतिशत बढ़कर 3.46 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इसमें रक्षा पेंशन की हिस्सेदारी 45.57 प्रतिशत, जबकि सिविल पेंशन की हिस्सेदारी 33.57 प्रतिशत बताई गई है।

















