बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2021 में कथित पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं से जुड़े मामले में जेल में बंद आयोग के पूर्व सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले को अत्यंत गंभीर माना।

कोर्ट ने कहा, पेपर लीक से टूटता है युवाओं का भरोसा

सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य और पूरे समाज के विश्वास पर सीधा आघात है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती हैं। अदालत ने इस स्थिति की तुलना 'बाड़ ही खेत को खाए' जैसी परिस्थिति से की।

सीबीआई जांच में क्या सामने आया

सीबीआई की जांच के अनुसार, तत्कालीन पीएससी अध्यक्ष, पूर्व सचिव और अन्य अधिकारियों पर अपने रिश्तेदारों तथा कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि सचिव पद पर रहते हुए जीवन किशोर ध्रुव को गोपनीय प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी और इसी का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।

बेटे के चयन को लेकर भी जांच में उठे सवाल

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जीवन किशोर ध्रुव के पुत्र सुमित ध्रुव, जिनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ था, उन्हें परीक्षा से पहले उन्हीं विषयों की तैयारी कराई गई थी, जिनसे बाद में प्रश्न पूछे गए। सीबीआई ने इसे मामले का महत्वपूर्ण पहलू बताया है।

तलाशी में मिले संवेदनशील दस्तावेज

जांच एजेंसी ने भिलाई स्थित आवास की तलाशी के दौरान मुख्य परीक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और उत्तर सामग्री बरामद होने का दावा किया है। सीबीआई के अनुसार, यह सामग्री कथित साजिश और गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग की आशंका को मजबूत करती है।

बचाव पक्ष ने रखी यह दलील

बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि शुरुआती एफआईआर में जीवन किशोर ध्रुव का नाम शामिल नहीं था। उनका तर्क था कि उन्होंने अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी पहले ही आयोग को दे दी थी और गोपनीय कार्यों से स्वयं को अलग कर लिया था। साथ ही यह भी कहा गया कि वे लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और जांच पूरी हो चुकी है।

सीबीआई के विरोध के बाद कोर्ट ने नहीं दी राहत

सीबीआई ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सचिव की होती है। एजेंसी का कहना था कि बरामद दस्तावेज, उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपी की कथित भूमिका की ओर संकेत करते हैं। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।

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