
हरियाणा : भिवानी जिले के नकीपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नवजात की मौत के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने संबंधित स्टाफ नर्स के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश की है। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की संभावना पर गंभीरता से विचार करने का निर्देश दिया है। आयोग का कहना है कि केवल कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करना परिवार को हुए अपूरणीय नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है।
तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के बाद दिया आदेश
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पूर्ण पीठ ने शिकायत पर सुनवाई के बाद ये निर्देश जारी किए। आयोग ने अपने आदेश में भिवानी के जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड की 16 जून की जांच रिपोर्ट को आधार बनाया।जांच में प्रसव के दौरान निर्धारित चिकित्सा प्रक्रियाओं का पालन नहीं किए जाने से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आई थीं। आयोग ने माना कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में उचित चिकित्सा सुविधा और देखभाल उपलब्ध कराना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
प्रसव के समय डॉक्टर की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल
जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, प्रसव के दौरान स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर मौजूद नहीं था। स्टाफ नर्स ने अन्य कर्मचारियों की मदद से प्रसव कराया। जांच में यह भी सामने आया कि गर्भावस्था को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया था। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की मौजूदगी और आवश्यक चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।रिपोर्ट में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने की बात भी कही गई। इसके अलावा, नवजात को मृत अवस्था में विशेष नवजात देखभाल इकाई में लाए जाने का उल्लेख किया गया। जांच के मुताबिक, बच्चे को तत्काल पुनर्जीवन संबंधी चिकित्सा सहायता की जरूरत थी, लेकिन नर्स ने टीकाकरण में महत्वपूर्ण समय लगा दिया।इन परिस्थितियों को देखते हुए आयोग ने मामले को गंभीर माना। उसके अनुसार, ऐसी लापरवाही सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों को मिलने वाली उचित देखभाल और जीवन के अधिकार से जुड़े सवाल खड़े करती है।
वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी
आयोग ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक और भिवानी के सिविल सर्जन को संबंधित नर्स के खिलाफ सेवा नियमों के तहत नियमित विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है।इसके साथ ही अधिकारियों को पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे पर विचार करने को कहा गया है। इस प्रक्रिया में जांच बोर्ड के निष्कर्षों, सामने आई चिकित्सा संबंधी खामियों और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की लापरवाही के मामलों में राज्य की जिम्मेदारी को ध्यान में रखना होगा।
पुलिस जांच में तेजी लाने के निर्देश
मामले में आपराधिक जांच भी जारी है। लोहारू थाना प्रभारी की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत 1 अगस्त को दर्ज एफआईआर संख्या 122 की जांच की जा रही है।आयोग ने भिवानी के पुलिस अधीक्षक को जांच में तेजी लाने और अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह रिपोर्ट आयोग के जांच निदेशक के माध्यम से दाखिल करनी होगी। साथ ही, जांच अधिकारी को मामले से संबंधित पूरा रिकॉर्ड लेकर उपस्थित होने को कहा गया है।
12 जनवरी 2027 को होगी अगली सुनवाई
आयोग ने तीनों वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने और अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। पुलिस को भी जांच की प्रगति से आयोग को अवगत कराना होगा।मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी 2027 के लिए निर्धारित की गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभागीय जांच, पुलिस कार्रवाई और मुआवजे से संबंधित प्रक्रिया में क्या प्रगति होती है।




















