
छत्तीसगढ़ : जिला खनिज न्यास यानी डीएमएफ फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय ने सतपाल सिंह छाबड़ा को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया है।एजेंसी के अनुसार, सतपाल सिंह छाबड़ा को 1 सितंबर 2026 को गिरफ्तार करने के बाद रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने मामले में उन्हें पांच दिन की ईडी हिरासत में भेजने की अनुमति दी है।
ACB-EOW की FIR के आधार पर शुरू हुई जांच
ईडी के मुताबिक, इस मामले में जांच की शुरुआत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर और छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से दर्ज अलग-अलग प्राथमिकी के आधार पर हुई। जांच एजेंसी का आरोप है कि खनन प्रभावित इलाकों और वहां के लोगों के विकास के लिए बने जिला खनिज न्यास फंड का कथित तौर पर एक संगठित सिंडिकेट ने दुरुपयोग किया।
9,188.20 करोड़ रुपये की राशि जांच के दायरे में
जांच एजेंसी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों को डीएमएफ के तहत करीब 9,188.20 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे।ईडी का आरोप है कि फंड की कुछ राशि निर्धारित विकास कार्यों के बजाय आपूर्ति आधारित कार्यों में खर्च की गई। एजेंसी का कहना है कि ऐसे कार्यों में कीमतों में कथित हेराफेरी और कमीशनखोरी की संभावना अधिक थी।
बीज निगम के जरिए भेजी गई बड़ी राशि
ईडी के मुताबिक, डीएमएफ फंड की एक बड़ी राशि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के माध्यम से भेजी गई। आरोप है कि एजेंटों और संपर्क सूत्रों ने दर अनुबंध वाले आपूर्तिकर्ताओं को जारी खरीद आदेशों के मूल मूल्य पर 25 से 50 प्रतिशत तक कथित कमीशन वसूला।जांच एजेंसी का दावा है कि इस कथित कमीशन की राशि का एक हिस्सा काम के आदेश जारी कराने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने के बदले सरकारी अधिकारियों तथा प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया गया।
सिंडिकेट के संपर्क सूत्र और वित्तीय समन्वयक होने का आरोप
ईडी ने सतपाल सिंह छाबड़ा पर कथित सिंडिकेट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। एजेंसी के अनुसार, वह संपर्क सूत्र और वित्तीय समन्वयक के तौर पर काम कर रहा था।ईडी का दावा है कि वह अधिक कमीशन की संभावना वाले आपूर्ति आधारित डीएमएफ कार्यों की पहचान करता था। इसके बाद इन कार्यों को चयनित आपूर्तिकर्ताओं के बीच प्रतिशत के आधार पर बांटने, काम के आदेश जारी कराने और भुगतान करवाने में कथित भूमिका निभाई गई।एजेंसी के अनुसार, आपूर्तिकर्ताओं से कथित कमीशन एकत्र करने और उसे सिंडिकेट से जुड़े लोगों के बीच बांटने में भी उसकी भूमिका रही।
पहले भी हुई थी तलाशी कार्रवाई
इस मामले में ईडी ने 3 और 4 सितंबर 2025 को पीएमएलए की धारा 17(1) के तहत तलाशी अभियान चलाया था। जांच एजेंसी के अनुसार, उस कार्रवाई के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए थे।
31 करोड़ रुपये का कथित अवैध कमीशन मिलने का दावा
ईडी ने बैंक खातों के लेनदेन और पीएमएलए की धारा 17 तथा 50 के तहत दर्ज बयानों के विश्लेषण के आधार पर दावा किया है कि सतपाल सिंह छाबड़ा को करीब 31 करोड़ रुपये का कथित अवैध कमीशन प्राप्त हुआ।एजेंसी के मुताबिक, यह रकम अपराध से अर्जित आय यानी प्रोसीड्स ऑफ क्राइम है। ईडी का दावा है कि यह राशि आरोपी, उसके परिवार के सदस्यों, हिंदू अविभाजित परिवारों और उसके नियंत्रण वाली संस्थाओं के खातों में प्राप्त हुई।अब पांच दिन की ईडी हिरासत के दौरान जांच एजेंसी सतपाल सिंह छाबड़ा से कथित वित्तीय लेनदेन, कमीशन नेटवर्क और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका को लेकर पूछताछ कर सकती है। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना बनी हुई है।




















