
मध्य प्रदेश : रबी फसलों की सिंचाई के साथ बिजली की खपत तेजी से बढ़ने की आशंका है। अक्टूबर में ही प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 17 हजार मेगावाट के आंकड़े को पार कर चुकी है। आने वाले महीनों में कृषि कार्यों और अन्य जरूरतों के चलते यह मांग बढ़कर 22 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है। संभावित स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने पहले से तैयारियां शुरू कर दी हैं। कंपनी की योजना अतिरिक्त बिजली खरीदकर मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने की है, ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली मिल सके।
तीन महीने के लिए होगी अतिरिक्त बिजली की खरीद
मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी 20 नवंबर 2026 से 20 फरवरी 2027 तक तीन महीने के लिए अल्पकालीन अनुबंधों के जरिए बिजली खरीदेगी। इसके लिए देश के बिजली उत्पादकों और कारोबारियों से दरें मांगी गई हैं।इस योजना के तहत सुबह और शाम के समय बिजली की बढ़ती जरूरत को पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार, सुबह 6:30 से 9:30 बजे तक अधिकतम 800 मेगावाट बिजली खरीदी जाएगी। वहीं, शाम 5 बजे से 7:30 बजे तक अधिकतम 300 मेगावाट अतिरिक्त बिजली लेने की तैयारी है।नवंबर से फरवरी के बीच इस व्यवस्था को चार चरणों में लागू करने का प्रस्ताव है। इसका प्रमुख उद्देश्य अधिक मांग वाले समय में बिजली की उपलब्धता बनाए रखना और संभावित कमी से बचना है।
एक साल में 5,439 मेगावाट बढ़ गई बिजली की मांग
प्रदेश में बिजली की खपत में हुई बढ़ोतरी सरकारी आंकड़ों में भी दिखाई दे रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 14 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश में अधिकतम बिजली मांग 17,313 मेगावाट दर्ज की गई। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 11,874 मेगावाट था। यानी एक साल के भीतर अधिकतम मांग में 5,439 मेगावाट की वृद्धि हुई।इससे पहले 14 जनवरी 2026 को प्रदेश की अधिकतम बिजली मांग 19,895 मेगावाट तक पहुंच गई थी। ऐसे में इस बार रबी सीजन के दौरान मांग 22 हजार मेगावाट के स्तर तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
बिजली उत्पादन के आंकड़ों में भी आया बदलाव
प्रदेश में बिजली की जरूरत के साथ उत्पादन के स्तर में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 में जल और ताप विद्युत गृहों से कुल 24,703 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ था।यह आंकड़ा वर्ष 2023-24 में बढ़कर 31,142 मिलियन यूनिट और 2024-25 में 31,547 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया। हालांकि, वर्ष 2025-26 के उपलब्ध आंकड़ों में उत्पादन 26,582.8 मिलियन यूनिट दर्ज किया गया है।
900 मेगावाट अतिरिक्त बिजली जुटाने की तैयारी
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्रदेश में मौजूदा बिजली घरों से 900 मेगावाट अतिरिक्त बिजली हासिल करने की योजना भी बनाई गई है। इसके साथ ही ताप विद्युत गृहों और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से बिजली की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।रबी सीजन में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना बिजली कंपनियों के लिए अहम चुनौती होगी। समय रहते अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था होने से किसानों की सिंचाई संबंधी जरूरतों को पूरा करने और घरेलू उपभोक्ताओं को आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।




















