
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में दिवाली से पहले ही वायु प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। त्योहार में अभी करीब एक सप्ताह का समय बाकी है, लेकिन शहर की हवा अभी से सांस लेने के लिए मुश्किल पैदा करने लगी है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 350 के आसपास पहुंच गया है। बारिश के कारण पिछले दो दिनों से प्रदूषण में कुछ कमी आई थी, लेकिन रविवार को एक बार फिर हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ गई।केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, रविवार सुबह 7 बजे दिल्ली का अधिकतम AQI 349 दर्ज किया गया। प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव अक्षरधाम मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिला। वहीं, इंडिया गेट और जनपथ के आसपास भी वायु गुणवत्ता सूचकांक 335 तक पहुंच गया।
दिल्ली के 23 इलाकों में AQI 300 के पार
राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के करीब 23 इलाकों में AQI 300 से ऊपर दर्ज किया गया। यह स्थिति बेहद खराब श्रेणी में आती है और लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक मानी जाती है।
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से पहले ही कई प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद हवा की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज होना चिंता का विषय बना हुआ है।
दिवाली से पहले प्रदूषण की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि त्योहार के दौरान हालात और बिगड़ सकते हैं। हालांकि, AQI के 500 तक पहुंचने की संभावना फिलहाल केवल अनुमान है। वास्तविक स्थिति मौसम, हवा की गति और प्रदूषण के स्रोतों पर निर्भर करेगी।
AQI की छह श्रेणियों में समझें हवा की स्थिति
वायु गुणवत्ता सूचकांक के जरिए यह पता लगाया जाता है कि किसी क्षेत्र की हवा कितनी स्वच्छ या प्रदूषित है। भारत में AQI को छह अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।
- अच्छा (0-50): हवा की गुणवत्ता अच्छी होती है और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका बहुत कम रहती है।
- संतोषजनक (51-100): हवा सामान्य तौर पर ठीक रहती है, हालांकि संवेदनशील लोगों को हल्की परेशानी हो सकती है।
- मध्यम (101-200): अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों को दिक्कत हो सकती है।
- खराब (201-300): लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से सांस संबंधी परेशानी बढ़ सकती है।
- बहुत खराब (301-400): लगातार प्रदूषण के संपर्क में रहने से स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
- गंभीर (401-500): यह सबसे खतरनाक श्रेणी है। इस स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
AQI 200 के ऊपर पहुंचना स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय
जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से अधिक हो जाता है, तब प्रदूषण का असर स्वास्थ्य पर अधिक स्पष्ट होने लगता है। सांस के मरीजों, बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
दिल्ली में AQI का 350 के करीब पहुंचना बताता है कि राजधानी की हवा फिलहाल बेहद खराब स्थिति में है। ऐसे में लोगों को अनावश्यक रूप से खुले वातावरण में रहने से बचना चाहिए और प्रदूषण के स्तर पर लगातार नजर रखनी चाहिए।
दिवाली से पहले प्रदूषण नियंत्रण बड़ी चुनौती
दिल्ली में हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर हो जाती है। कम हवा की गति, मौसम में बदलाव, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियां और अन्य प्रदूषणकारी स्रोत हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
इस बार दिवाली से पहले ही AQI का 350 के आसपास पहुंचना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है। आने वाले दिनों में मौसम की परिस्थितियां और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय तय करेंगे कि राजधानी की हवा में कितना सुधार हो पाता है। फिलहाल दिल्लीवासियों को बेहद खराब वायु गुणवत्ता के बीच अपनी सेहत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।











