
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन को लेकर नया विवाद सामने आया है। मानवाधिकार संरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामजी सुनेजा ने प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र नारेबाजी पर आपत्ति जताई है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर प्रदर्शन में शामिल लोगों और आयोजकों के खिलाफ FIR दर्ज करने तथा कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप
रामजी सुनेजा ने अपने पत्र में सितंबर 2026 में जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन का जिक्र किया है। उनका आरोप है कि इस दौरान कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। सुनेजा का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर मर्यादा बनाए रखना भी जरूरी है।उन्होंने आयोजकों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शन की जिम्मेदारी संभालने वालों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कार्यक्रम के दौरान कानून का उल्लंघन न हो। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
आयोजकों की जवाबदेही तय करने की मांग
राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में सुनेजा ने प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि आयोजकों की जिम्मेदारी है कि वे कार्यक्रम के दौरान अनुचित गतिविधियों को रोकें और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने दें।हालांकि, प्रदर्शन के दौरान लगाए गए कथित नारों और संबंधित लोगों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर पुनर्विचार का अनुरोध
सुनेजा ने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों की समीक्षा के लिए पुनर्विचार याचिका दायर करने का अनुरोध भी किया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों में पहले मिली राहत का हवाला देते हुए दावा किया कि इससे ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने में अपेक्षित सफलता नही मिली।पत्र में उन्होंने राजद्रोह के आरोप और सार्वजनिक दंड जैसे कठोर कदमों की मांग भी उठाई है। हालांकि, किसी भी मामले में दंड का निर्धारण कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है।
नाबालिगों की भागीदारी पर भी उठाए सवाल
रामजी सुनेजा ने प्रदर्शन में नाबालिगों की कथित मौजूदगी का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने मांग की है कि यदि किसी नाबालिग की गैरकानूनी गतिविधियों में भूमिका सामने आती है, तो उसके अभिभावकों की जिम्मेदारी की भी जांच की जाए।हालांकि, किसी नाबालिग के प्रदर्शन में शामिल होने मात्र से उसके माता-पिता को स्वतः दोषी नही ठहराया जा सकता। इसके लिए संबंधित कानून और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच जरूरी है।
पहले भी कई मुद्दों पर प्रदर्शन कर चुकी है CJP
CJP पिछले कुछ महीनों से अलग-अलग मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रही है। जुलाई में संगठन ने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर प्रदर्शन किया था। इसके बाद अक्टूबर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया।इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच टकराव तथा हिरासत में लिए जाने की घटनाएं भी सामने आई थीं।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी जताई थी चिंता
अक्टूबर में हुए प्रदर्शनों को लेकर ह्यूमन राइट्स वॉच ने 13 अक्टूबर को बयान जारी कर प्रदर्शनकारियों की कथित मनमानी हिरासत और पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई थी। संगठन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों की सुरक्षा और आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता व्यक्त की थी। इसके जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखना भी जरूरी है। मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणियों को भारत के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताया था।
अभिव्यक्ति की आजादी और सार्वजनिक मर्यादा पर बहस
इस विवाद ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक प्रदर्शनों में मर्यादा को लेकर बहस छेड़ दी है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता देता है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध भी लागू होते है।किसी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की आलोचना करना अपने आप में अपराध नही है। लेकिन धमकी देने, हिंसा के लिए उकसाने या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।फिलहाल रामजी सुनेजा की शिकायत के आधार पर किसी नई FIR दर्ज होने या कार्रवाई शुरू किए जाने की आधिकारिक पुष्टि सामने नही आई है। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से इस पत्र पर क्या कदम उठाया जाएगा, यह भी स्पष्ट नही है। अब इस मामले में जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।











