रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की नई नक्सलवादी आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। इसी नीति के तहत दंतेवाड़ा जिले के नक्सल प्रभावित परिवार से आने वाले देवा मंडावी को शासकीय सेवा में नियुक्ति प्रदान की गई है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक जीवन और स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना है।

कलेक्टर कार्यालय में मिली नियुक्ति

देवा मंडावी दंतेवाड़ा जिले के विकासखंड कुआकोण्डा अंतर्गत ग्राम धुरवापारा, अरनपुर के निवासी हैं। जिला स्तरीय पुनर्वास समिति की अनुशंसा और दंतेवाड़ा कलेक्टर की स्वीकृति के बाद उन्हें कलेक्टर कार्यालय की भू अभिलेख शाखा में भृत्य के पद पर नियुक्त किया गया है। वे जल्द ही अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

पुनर्वास नीति के तहत मिली नौकरी

यह नियुक्ति गृह विभाग द्वारा 28 मार्च 2025 को जारी 'छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025' के प्रावधानों के तहत की गई है। इस नीति का उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को रोजगार और पुनर्वास के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ना है।

सातवें वेतन आयोग का मिलेगा लाभ

सरकारी सेवा में नियुक्ति के साथ देवा मंडावी को सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मैट्रिक्स लेवल 1 का वेतन, महंगाई भत्ता और शासन के नियमों के तहत मिलने वाली अन्य सभी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।

आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन पर सरकार का जोर

राज्य सरकार का मानना है कि पुनर्वास नीति केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को स्थायी आजीविका, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना भी है।

मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में अहम पहल

सरकार का कहना है कि ऐसी नियुक्तियां नक्सल प्रभावित परिवारों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बन रही हैं। पुनर्वास नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रभावित परिवारों में नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार हो रहा है।

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