

रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है। हर रात हाथियों के दल जंगल से निकलकर खेतों और बस्तियों तक पहुंच रहे हैं। मंगलवार रात अलग-अलग रेंज में हाथियों ने 18 किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंचाया, वहीं तीन कच्चे मकानों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के बाद वन विभाग की टीम नुकसान का आकलन करने में जुट गई है।
जानकारी के अनुसार, धरमजयगढ़ रेंज के मेढ़रमार क्षेत्र में दो हाथी खेतों में पहुंच गए और किसान धीरेन्द्र मंडल की फसल को नुकसान पहुंचाया। वहीं पोटिया बीट के गेरसा गांव में हाथी ने अमीचंद के कच्चे मकान की दीवार ढहा दी। मकान में रखी चावल की बोरियां भी हाथियों के कारण क्षतिग्रस्त हो गईं।इसी तरह बोरो रेंज के रूंआफुल बीट में करीब 16 हाथियों का दल सक्रिय है। बताती गांव में हाथियों ने गणेश, मुनी सहित एक अन्य किसान के खेत में लगी धान की फसल को रौंद दिया। बोरो रेंज के चाल्हा क्षेत्र में पतरस केरकेट्टा की धान की फसल भी हाथियों के हमले से बर्बाद हुई है।
कापू रेंज के अलोला बीट में 12 और पुटुकछार बीट में 17 हाथियों की मौजूदगी बताई जा रही है। मंगलवार रात अलोला बीट के तालगांव में तिहारू, घूर सिंह, समिति, लल्लू, बालेश्वर, फूलसिंह और सुलेशन के धान के खेतों में हाथियों ने जमकर नुकसान किया।वहीं पुटुकछार क्षेत्र में अजित, संतोष, होरासाय, शोभानाथ, बृजमोहन और कमिल की धान की फसल को नुकसान पहुंचा। इसी दौरान संतोष के कच्चे मकान को भी हाथियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया।
हाथियों के जंगल से निकलकर खेतों और बस्ती की ओर पहुंचने की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना देने के साथ हाथियों को भगाने के लिए हो-हल्ला किया, लेकिन हाथियों का दल देर रात तक इलाके में डटा रहा। हाथियों के वापस जंगल की ओर लौटने के बाद बुधवार को वन विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची और नुकसान का आकलन शुरू किया।
जिले में 170 हाथियों की मौजूदगी
रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ और रायगढ़ दोनों वन मंडलों में कुल 170 हाथी मौजूद हैं। इनमें धरमजयगढ़ वन मंडल में 103 हाथी हैं, जिनमें 31 नर, 45 मादा और 27 शावक शामिल हैं। वहीं रायगढ़ वन मंडल में 67 हाथी हैं। इनमें 18 नर, 38 मादा और 11 शावक बताए गए हैं।वन विभाग द्वारा हाथियों की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए मुनादी भी कराई जा रही है। लगातार बढ़ रही हाथियों की आवाजाही के चलते ग्रामीणों में फसल और जान-माल की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।











