नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए भाजपा ने देशभर में राजनीतिक अभियान तेज कर दिया है। पार्टी पदयात्राओं, जनसभाओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए विपक्ष के वोट चोरी संबंधी आरोपों का मुकाबला कर रही है। इस अभियान में बड़े नेताओं की भागीदारी के साथ सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भी प्रमुखता देने की रणनीति बनाई गई है।भाजपा का मकसद SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष जनता तक पहुंचाना है। पार्टी इस अभियान के जरिए करीब 10 लाख युवाओं और पेशेवरों तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
विपक्ष ने 13 करोड़ नाम हटाने को लेकर उठाए सवाल
1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली हुई थी। इसमें राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने SIR के दौरान करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की थी।इसके जवाब में भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को अराजकता फैलाने की कोशिश बताया। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची से हटाए गए नाम मृतकों, दूसरी जगह जा चुके लोगों, अनुपस्थित मतदाताओं और दोहराई गई प्रविष्टियों से जुड़े हैं। भाजपा का दावा है कि विपक्ष अब तक गलत तरीके से हटाए गए किसी एक नाम का भी प्रमाण नहीं दे पाया है। पार्टी यह भी कह रही है कि कांग्रेस के शासनकाल में भी कई बार मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण किया गया था।
22 अक्टूबर से दो चरणों में शुरू हुआ अभियान
भाजपा ने इन आरोपों के जवाब में 22 अक्टूबर से देशव्यापी कार्यक्रम शुरू किया है। अभियान दो चरणों में चलाया जा रहा है। इसके पहले चरण का समापन 5 नवंबर को हुआ। इस मौके पर हरियाणा के करनाल में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रैली में हिस्सा लिया, जबकि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पदयात्रा का नेतृत्व किया।पार्टी की योजना पदयात्राओं, जनसभाओं, युवा संवाद, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की है। अभियान में मतदाता सूची से घुसपैठियों के नाम हटाने और सूची को त्रुटिरहित बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
अमित शाह, योगी और नड्डा समेत बड़े नेता संभाल रहे मोर्चा
भाजपा ने इस अभियान में केंद्रीय और राज्य स्तर के वरिष्ठ नेताओं को भी जिम्मेदारी दी है। अमित शाह करनाल में पदयात्रा और रैली में शामिल हुए। योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद में मार्च का नेतृत्व किया। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन इससे पहले गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ के साथ पदयात्रा कर चुके हैं।वहीं, जेपी नड्डा भोपाल और बरेली में कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। अन्य केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री भी अलग-अलग राज्यों में पदयात्राओं और जनसभाओं के जरिए अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।
कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भी अभियान से जोड़ने की तैयारी
भाजपा इस अभियान को केवल विपक्ष के आरोपों का जवाब देने तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों को भी अपने जनसंपर्क कार्यक्रमों में आगे रखने की तैयारी कर रही है।इस रणनीति में पीएम-किसान, प्रधानमंत्री आवास योजना और महिलाओं को नकद सहायता देने वाली योजनाओं का उल्लेख किया जाएगा। पार्टी इन योजनाओं के जरिए करोड़ों लाभार्थियों तक पहुंचाए गए सीधे लाभ को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करना चाहती है।इसके अलावा अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त एक्सटेंशन देने के मुद्दे को भी अभियान में प्रमुखता से उठाने की योजना है। भाजपा 2011 से 2023 के बीच गरीबी में आई तेज गिरावट का दावा करते हुए इसे अपनी सरकार की उपलब्धियों से जोड़ रही है।
लाभार्थियों की पहचान के लिए EPIC और बायोमेट्रिक सत्यापन का मुद्दा
हाल ही में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा था कि पंचायती राज से जुड़ी योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान और भुगतान के लिए आधार के स्थान पर वोटर आईडी यानी EPIC नंबर और बायोमेट्रिक सत्यापन का इस्तेमाल किया जाएगा।भाजपा इसे फर्जी लाभार्थियों को रोकने और पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की व्यवस्था बता रही है। दूसरी ओर, विपक्ष ने इस बदलाव को SIR से जोड़ते हुए आशंका जताई है कि मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए जाएंगे, वे सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित हो सकते हैं।भाजपा का तर्क है कि साफ मतदाता सूची और सही लाभार्थियों की पहचान से व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
आगे भी जारी रहेंगे जिला स्तर के कार्यक्रम
पार्टी आने वाले दिनों में जिला स्तर पर पदयात्राएं, युवा संवाद और डिजिटल प्रचार अभियान जारी रखने की तैयारी में है। भाजपा SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ ही अपनी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और उनके जरिए मिले लाभ को भी जनता के सामने रखना चाहती है।इस तरह मतदाता सूची का पुनरीक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ अब राजनीतिक बहस के दो प्रमुख मुद्दे बन गए हैं। भाजपा इन दोनों विषयों को जोड़कर अपने पक्ष में जनसमर्थन जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है।









