

बिलासपुर हाई कोर्ट का सख्त संदेश, नामांतरण आदेश नहीं मानने वाले पटवारी पर लटकी निलंबन की तलवार
सात दिन में राजस्व रिकॉर्ड सुधारने का आदेश, लापरवाही पर होगी विभागीय कार्रवाई
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने में की गई देरी को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए संबंधित पटवारी को कड़ी चेतावनी दी है। अदालत ने साफ कहा है कि यदि सात दिनों के भीतर नामांतरण आदेश का पालन नहीं किया गया और समय पर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई, तो संबंधित पटवारी के खिलाफ निलंबन, विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
मुंगेली जिले के ग्राम दाड़गांव निवासी पवन कुमार भास्कर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उनकी कृषि भूमि के नामांतरण को लेकर राजस्व न्यायालय पहले ही आदेश पारित कर चुका है। खसरा नंबर 239/1 और 355/1 से जुड़ी भूमि के संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), पथरिया ने 18 नवंबर 2024 को उनके पक्ष में फैसला दिया था।
इसके बाद नायब तहसीलदार ने 30 मई 2025 को संबंधित हल्का पटवारी को राजस्व अभिलेखों में आवश्यक संशोधन कर नाम दर्ज करने का निर्देश जारी किया। इस आदेश के पालन के लिए 10 जून 2025 को औपचारिक ज्ञापन भी भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किया गया।
आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
याचिकाकर्ता का कहना था कि सक्षम अधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद महीनों तक नामांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं होने से उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ा, जिसके बाद न्याय के लिए हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने आदेशों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने हल्का पटवारी क्रमांक-3, तहसील पथरिया को निर्देश दिया कि आदेश प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर नामांतरण संबंधी सभी निर्देशों का पालन करते हुए राजस्व रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता का नाम दर्ज किया जाए।
कलेक्टर को भी सौंपी निगरानी की जिम्मेदारी
अदालत ने मुंगेली कलेक्टर को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि अधीनस्थ राजस्व अधिकारी निर्धारित समय सीमा में आदेश का पालन करें।
10 दिन में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
हाई कोर्ट ने संबंधित पटवारी को आदेश के पालन की विस्तृत रिपोर्ट 10 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तय समय में आदेश का पालन नहीं हुआ या रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन, विभागीय जांच और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।











