बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जेल विभाग से जुड़े एक सेवा विवाद में राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए 86 दिन की देरी से दायर रिट अपील खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकारी विभागों को भी अन्य पक्षकारों की तरह निर्धारित समय-सीमा का पालन करना होगा। केवल फाइलों की आवाजाही और प्रशासनिक प्रक्रिया को देरी माफ करने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।

45 दिन की समय सीमा पार होने पर खारिज हुई अपील

मामला मुंगेली जिला जेल में पदस्थ जेल वार्डन संजय कुमार साहू से जुड़ा है। उनके पक्ष में 21 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य शासन, जेल एवं सुधारात्मक सेवा विभाग और केंद्रीय जेल अधीक्षक, जगदलपुर की ओर से रिट अपील दायर की गई।

हालांकि यह अपील निर्धारित 45 दिन की समय सीमा के बजाय 86 दिन की देरी से दाखिल की गई, जिसके चलते डिवीजन बेंच ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

सरकार ने बताई प्रशासनिक प्रक्रिया की वजह

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सिंगल बेंच का आदेश मिलने के बाद फाइल जेल मुख्यालय, गृह विभाग, महाधिवक्ता कार्यालय और विधि विभाग के बीच विचाराधीन रही। कानूनी राय लेने, आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करने और अधिकारी नियुक्त करने जैसी प्रक्रियाओं में समय लगने के कारण अपील तय समय के भीतर दाखिल नहीं हो सकी।

हाईकोर्ट ने कहा- प्रशासनिक प्रक्रिया देरी का पर्याप्त कारण नहीं

डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई मामलों में स्पष्ट कर चुका है कि सरकारी विभागों को देरी माफ कराने का कोई विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है। नौकरशाही या प्रशासनिक प्रक्रिया अपने-आप में विलंब को उचित ठहराने का आधार नहीं बन सकती।

अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि समय-सीमा के भीतर अपील दायर करना किसी असाधारण या अपरिहार्य परिस्थिति के कारण संभव नहीं था। आवेदन में केवल विभागीय पत्राचार और फाइलों के आवागमन का उल्लेख किया गया, लेकिन समय रहते आवश्यक कदम उठाने के ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए।

सरकारी विभागों के लिए दिया स्पष्ट संदेश

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में दोहराया कि कानून की नजर में सभी पक्ष समान हैं। चाहे निजी व्यक्ति हो या सरकारी विभाग, सभी को न्यायालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा का पालन करना अनिवार्य है। पर्याप्त और ठोस कारण के अभाव में 86 दिन की देरी को माफ नहीं किया जा सकता, इसलिए राज्य सरकार की रिट अपील खारिज कर दी गई।

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