

रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में साइबर ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने महिला सहित पांच अंतर्राज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह खुद को टेलीकॉम अधिकारी, पुलिस अधिकारी और सीबीआई अफसर बताकर लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाता था और लाखों रुपये की ठगी को अंजाम देता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने रायगढ़ निवासी सेवानिवृत्त विद्युत विभाग के पर्यवेक्षक नरेन्द्र ठाकुर से करीब 36.97 लाख रुपये की ठगी की थी। पीड़ित को कॉल कर पहले खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी से जुड़ा अधिकारी बताया गया और फिर मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी गई। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर आरोपी ने “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया और जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए।मामले की शिकायत 17 फरवरी 2026 को साइबर थाना रायगढ़ में दर्ज की गई, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच, बैंक ट्रेल और साइबर इंटेलिजेंस के आधार पर आरोपियों की पहचान की। जांच में पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा राजस्थान के भीलवाड़ा में जमा हुआ है। इसके आधार पर पुलिस टीम ने वहां दबिश देकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कियागिरफ्तार आरोपियों में राहुल व्यास (बंधक बैंक कर्मचारी), रविराज सिंह, संजय मीणा, आरती राजपूत (वेब डेवलपर) और गौरव व्यास शामिल हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह संगठित गिरोह देशभर में सक्रिय था और अब तक करीब 1.40 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी कर चुका है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया है। साथ ही कई संदिग्ध बैंक खातों को सीज कर दिया गया है। आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाकर आगे की पूछताछ की जा रही है। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने लोगों से अपील की है कि “डिजिटल अरेस्ट” या किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाले कॉल से सावधान रहें। कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए पैसे ट्रांसफर नहीं कराती। ऐसी स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें और किसी भी प्रकार की निजी जानकारी साझा न करें।
इस कार्रवाई में साइबर थाना रायगढ़ की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया।
































