

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बड़ी आगजनी की घटना ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। साउथ 24 परगना जिला परिषद कार्यालय में लगी आग में 4,000 से अधिक ईवीएम, बैलेट यूनिट और वीवीपैट मशीनें जलकर पूरी तरह नष्ट हो गईं। घटना के बाद चुनावी पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
मौके पर पहुंचे अधिकारी, चुनाव आयोग को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
आग की सूचना मिलते ही संबंधित प्रशासनिक अधिकारी और चुनाव विभाग के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। प्रारंभिक निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे चुनाव आयोग को भेजा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल हुई थीं मशीनें
राज्य के अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं से जुड़े मंत्री ने बताया कि आग में नष्ट हुई अधिकांश मशीनों का उपयोग इसी वर्ष हुए विधानसभा चुनावों के दौरान लगभग दस निर्वाचन क्षेत्रों में किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि आग भवन की ऊपरी मंजिलों तक कैसे पहुंची, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है।
आग लगने की वजह अब तक साफ नहीं
फिलहाल आग लगने के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। प्रशासन ने मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए पुलिस से विस्तृत जांच की मांग की है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से आग के स्रोत और परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है।
राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
घटना के बाद विपक्ष ने सरकार और चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि जिन मशीनों के नष्ट होने की बात कही जा रही है, क्या उनका हालिया चुनावों में वास्तव में इस्तेमाल हुआ था।
दुर्घटना या सबूत मिटाने की कोशिश?
पवन खेड़ा ने आशंका जताते हुए कहा कि यदि मशीनों के उपयोग और उनके रिकॉर्ड को लेकर पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, तो इस घटना को लेकर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं यह केवल एक सामान्य दुर्घटना तो नहीं या फिर ऐसा घटनाक्रम है जिसने कई नई शंकाओं को जन्म दे दिया है।
चुनावी व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
ईवीएम और वीवीपैट जैसी महत्वपूर्ण चुनावी मशीनों के बड़ी संख्या में नष्ट होने से चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आग किन परिस्थितियों में लगी और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या अन्य कारण शामिल थे।
जांच रिपोर्ट से खुलेगा पूरे मामले का सच
फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक एजेंसियां मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि आग तकनीकी कारणों से लगी थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। तब तक यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति और चुनावी व्यवस्था से जुड़ी चर्चाओं का केंद्र बना रहने की संभावना है।





















