पश्चिम बंगाल : चुनाव के दोनों चरण पूरे हो चुके हैं और अब 4 मई को आने वाले नतीजों का इंतजार है। लेकिन परिणाम से पहले ही राज्य की राजनीति में भारी तनाव देखने को मिल रहा है। स्ट्रांग रूम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सियासी टकराव में बदल चुका है।

स्ट्रांग रूम को लेकर कैसे भड़का विवाद: आरोपों से शुरू हुआ टकराव

मामला कोलकाता के भवानीपुर इलाके से जुड़ा है, जहां टीएमसी नेताओं कुणाल घोष और शशी पांजा ने आरोप लगाया कि कुछ लोग स्ट्रांग रूम के अंदर संदिग्ध तरीके से घूम रहे थे। इसके बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया और देखते ही देखते हजारों लोग वहां जुट गए। स्ट्रांग रूम के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू हो गया।

इसी दौरान जैसे ही भाजपा प्रत्याशी तापस राय वहां पहुंचे, दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

नारेबाजी और हंगामा: हालात बेकाबू होते गए

घटना के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने जय श्री राम के नारे लगाए, जबकि टीएमसी समर्थकों ने जय बांग्ला के नारे लगाए। दोनों ओर से माहौल और गरमाता गया, जिससे स्थिति पर नियंत्रण मुश्किल हो गया।

स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया गया।

सीसीटीवी फुटेज और आरोप: टीएमसी का बड़ा दावा

टीएमसी ने एक सीसीटीवी फुटेज जारी कर दावा किया है कि कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम स्थित स्ट्रांग रूम में बैलेट बॉक्स के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई। इस दावे ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।

मौके पर पहुंचीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

तनाव बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद स्थिति का जायजा लेने सखावत मेमोरियल स्कूल में बने स्ट्रांग रूम पहुंचीं और वहां काफी देर तक मौजूद रहीं।

चुनाव आयोग का रुख: सभी आरोप खारिज

इस पूरे विवाद पर भारत निर्वाचन आयोग ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और स्थिति को सामान्य बताया है।

नतीजों से पहले बढ़ा तनाव: सियासी टकराव चरम पर

चुनाव परिणाम से ठीक पहले स्ट्रांग रूम को लेकर उठे इस विवाद ने बंगाल की राजनीति को और गरमा दिया है। अब सभी की नजर 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी है, लेकिन उससे पहले सियासी टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।

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