

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस द्वारा साय सरकार के खिलाफ लाया गया 136 बिंदुओं का अविश्वास प्रस्ताव लंबी बहस के बाद ध्वनिमत से खारिज हो गया। लगभग 14 घंटे 26 मिनट तक चली चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे का दौर चलता रहा। अंततः देर रात करीब 2:36 बजे विधानसभा ने अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
दोपहर करीब 12:10 बजे शुरू हुई चर्चा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुल 18 विधायकों ने अपने-अपने पक्ष रखे। बहस के दौरान कई बार माहौल गर्माया और एक चरण में हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी। प्रस्ताव खारिज होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करते हुए दिसंबर के अंतिम सप्ताह में शीतकालीन सत्र बुलाने की घोषणा की।चर्चा की शुरुआत नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने की। उन्होंने सरकार के अब तक के कार्यकाल को जनविरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने आदिवासियों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के हितों की अनदेखी की है। इसके जवाब में भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस शासनकाल पर भ्रष्टाचार और लूट के आरोप लगाते हुए विपक्ष को आत्ममंथन करने की सलाह दी।
बहस के दौरान उस समय सदन में हंगामा मच गया, जब उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपने भाषण में माओवादी हिडमा के संदर्भ में राहुल गांधी का उल्लेख किया। कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने इस बयान के समर्थन में प्रमाण मांगा, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और सत्ता पक्ष ने उनकी बॉडी लैंग्वेज पर भी आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने पर अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी।
बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अविश्वास प्रस्ताव को महज औपचारिकता बताया। उन्होंने कांग्रेस के पिछले कार्यकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उस दौरान सरकार आंतरिक खींचतान और सत्ता संघर्ष में उलझी रही। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया और कहा कि वर्तमान सरकार महतारी वंदन योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अपने वादों को पूरा कर रही है। उन्होंने सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन का दावा भी किया।










