

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के बागी गुट ने कोलकाता स्थित टीएमसी मुख्यालय पहुंचकर उस पर अपना दावा जताया। बैठक के बाद नेताओं ने कहा कि वे ही पार्टी के वास्तविक प्रतिनिधि हैं, इसलिए मुख्यालय पर उनका अधिकार है।
बताया जा रहा है कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में फिरहाद हकीम, जावेद खान, संदीपन साहा, अखरुज्जमान सहित करीब 60 विधायक पार्टी कार्यालय पहुंचे। सभी नेताओं ने वहां बैठक की और बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताया।
चुनावी हार के बाद गहराया अंदरूनी विवाद
विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही पार्टी के भीतर दो गुटों के बीच मतभेद लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बागी नेताओं और ममता बनर्जी समर्थक खेमे के बीच कई मुद्दों पर खुलकर टकराव देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब बागी गुट ने 2022 से संचालित पार्टी मुख्यालय में पहुंचकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
बीजेपी ने ममता बनर्जी पर साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस में बढ़ते विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस में बड़े पैमाने पर नेताओं का भरोसा टूट चुका है। उन्होंने कहा कि सांसदों, विधायकों, महापौरों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का एक बड़ा वर्ग पार्टी नेतृत्व से दूरी बना चुका है और अब पार्टी के भीतर ममता बनर्जी का समर्थन सीमित रह गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब चुनाव आयोग को तय करना होगा कि असली तृणमूल कांग्रेस किसे माना जाए।
चुनाव आयोग से पहले ही किया था चुनाव चिन्ह का दावा
मुख्यालय पर दावे से एक दिन पहले ही बागी गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के चुनाव चिन्ह पर अपना दावा पेश किया था। बागी विधायक संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व जनता की भावनाओं और जमीनी हकीकत से पूरी तरह कट चुका था। उनके अनुसार यही कारण रहा कि पार्टी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी नजर
बागी गुट द्वारा संगठन और चुनाव चिन्ह दोनों पर दावा किए जाने के बाद अब पूरे मामले पर चुनाव आयोग के संभावित निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में आयोग का फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।











