पश्चिम बंगाल : में लंबे समय से चल रहे मतदाता सूची विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से लगातार चुनाव आयोग पर वोट काटने और मतदाताओं को मतदान से वंचित करने के आरोप लगाए जा रहे थे। इसी मामले में अब कोर्ट ने चुनाव आयोग को सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी करने का आदेश दिया है।

सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट से लाखों मतदाताओं को राहत
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि उन सभी लोगों को सूची में शामिल किया जाए जिनकी अपील ट्रिब्यूनल में स्वीकार कर ली गई है। जिन मामलों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर हो जाएगा, उन्हें भी इस सूची में जोड़ा जाएगा। इससे बड़ी संख्या में मतदाताओं को मतदान का अधिकार मिल सकेगा।

समय सीमा तय, चरणबद्ध चुनाव प्रक्रिया पर असर
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले चरण के लिए 21 अप्रैल तक जिन मामलों का निपटारा हो जाएगा, उन्हें शामिल किया जाएगा। वहीं दूसरे चरण के लिए 27 अप्रैल तक तय मामलों को सप्लीमेंट्री सूची में जगह दी जाएगी। राज्य में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने हैं।

कोर्ट की अहम टिप्पणी, मतदान अधिकार संवैधानिक और भावनात्मक दोनों
सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि मतदान केवल संवैधानिक अधिकार ही नहीं बल्कि भावनात्मक अधिकार भी है। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी लंबित मामलों को शामिल करने से प्रशासनिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, इसलिए केवल पात्र और सत्यापित मतदाताओं को ही जोड़ा जाएगा।

34 लाख से अधिक आपत्तियां, 90 लाख वोट कटने का दावा
एसआईआर प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल में 90 लाख से अधिक वोट कटने की बात सामने आई है। इसके बाद 19 ट्रिब्यूनलों में करीब 34 लाख लोगों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इनमें से कुछ मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि बड़ी संख्या अभी लंबित है।

राजनीतिक विवाद और टीएमसी का विरोध
वोटर लिस्ट से नाम हटाने को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद भी गहरा गया था। टीएमसी ने इसे लेकर विरोध प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग से मुलाकात की। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पार्टी ने राहत की सांस ली है।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!