

बलौदा बाजार : जिले के भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को कठोर सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश भाटापारा सतीश कुमार जायसवाल की अदालत ने आरोपी मनोज साहू को 20 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा दी है।
शादी का झांसा देकर नाबालिग को ले जाने का आरोप
प्रकरण के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 30 सितंबर 2024 को थाना भाटापारा ग्रामीण में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग बेटी रात करीब 9 बजे घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने आसपास के क्षेत्रों और रिश्तेदारों के यहां काफी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली।अगले दिन 1 अक्टूबर को जानकारी मिली कि ग्राम दतरेंगा निवासी मनोज साहू लड़की को शादी का झांसा देकर अपने साथ ले गया है और उसे अपनी दुकान में छिपाकर रखा है। परिजन जब वहां पहुंचे तो पीड़िता आरोपी के साथ मिली।
लगातार शोषण का आरोप, एक साल तक फंसाए रखने का दावा
पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि आरोपी ने उसे प्रेम जाल में फंसाकर जबरन शारीरिक संबंध बनाए। उसने यह भी बताया कि आरोपी पिछले लगभग एक साल से उसे झांसा देकर शोषण कर रहा था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस जांच और कोर्ट में पेश हुए साक्ष्य
पुलिस ने पीड़िता को बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान गवाहों के बयान दर्ज किए गए और सभी साक्ष्य एकत्र कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।इस मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक संजय बाजपेयी ने प्रभावी पैरवी की और आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग की।
कोर्ट का सख्त फैसला: 20 साल की सजा और अर्थदंड
अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई।
धारा 137 के तहत 3 वर्ष, धारा 87 के तहत 5 वर्ष कठोर कारावास और अर्थदंड के साथ, साथ ही पोक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
न्याय व्यवस्था का सख्त संदेश
यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर न्याय व्यवस्था के कड़े रुख को दर्शाता है। साथ ही यह भी संकेत देता है कि ऐसे मामलों में दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

































