नई दिल्ली। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-एनसीआर के लिए दो वर्षीय विशेष परिवहन सुधार योजना को मंजूरी दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर 9,585 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसका मुख्य उद्देश्य पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को सड़कों से हटाकर स्वच्छ और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है।

पुराने वाहनों की जगह लेंगे बीएस-6 और इलेक्ट्रिक वाहन

योजना के तहत बीएस-4 और उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले ट्रकों और बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। उनकी जगह बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

चार राज्यों के सहयोग से होगा क्रियान्वयन

इस योजना का वित्तपोषण National Capital Region Planning Board द्वारा किया जाएगा। इसे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों के सहयोग से लागू किया जाएगा।

प्रदूषण में ट्रक और बसों की बड़ी हिस्सेदारी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में परिवहन क्षेत्र पीएम 2.5 प्रदूषण का 14 प्रतिशत, कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन का 40 प्रतिशत और नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन का 63 प्रतिशत योगदान देता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रक और बसें कुल वाहनों का केवल 3 प्रतिशत हिस्सा हैं, लेकिन पीएम 2.5 उत्सर्जन में उनकी हिस्सेदारी 36 प्रतिशत तक है। इसी कारण सरकार ने सबसे पहले भारी वाहनों को इस योजना के दायरे में लाने का फैसला किया है।

दो लाख से अधिक वाहन मालिकों को मिलेगा लाभ

इस योजना से करीब 2.07 लाख वाहन मालिकों को सीधा फायदा मिलने का अनुमान है। इनमें लगभग 1.91 लाख ट्रक मालिक और 16,329 बस संचालक शामिल हैं।

वाहन मालिकों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन पैकेज

सरकार ने नए और स्वच्छ वाहनों को अपनाने के लिए कई वित्तीय सुविधाएं देने का निर्णय लिया है।

  • वाहन ऋण पर पांच वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी।
  • वाहन श्रेणी के अनुसार हर माह 4,800 रुपये तक ईंधन वाउचर।
  • इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर विशेष एकमुश्त प्रोत्साहन राशि।
  • नए वाहनों के पंजीकरण शुल्क में पूर्ण छूट।
  • मोटर वाहन कर में 10 वर्षों तक 100 प्रतिशत तक राहत।
  • पुराने वाहनों पर लंबित देनदारियों की माफी।
  • वाहन निर्माता कंपनियों की ओर से नए वाहनों की एक्स-शोरूम कीमत पर 8 प्रतिशत तक की छूट।

पुराने वाहनों के लिए सख्त नियम

योजना के तहत बीएस-3 और उससे पुराने वाहनों को अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्रों पर भेजना अनिवार्य होगा। वहीं बीएस-4 वाहनों को या तो स्क्रैप किया जा सकेगा या फिर एनसीआर के बाहर ऐसे शहरों में बेचा जा सकेगा जो गैर-एनसीएपी श्रेणी में आते हैं।

दिल्ली में इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों को प्राथमिकता

दिल्ली के लिए विशेष प्रावधान भी किए गए हैं। योजना के तहत खरीदे जाने वाले हल्के मालवाहक वाहन केवल इलेक्ट्रिक श्रेणी के होंगे। वहीं बसों की खरीद केवल बीएस-6 सीएनजी या इलेक्ट्रिक श्रेणी में ही की जा सकेगी।

डिजिटल पोर्टल से होगी पूरी निगरानी

योजना के प्रभावी संचालन के लिए एक समर्पित डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से पात्रता जांच, सब्सिडी वितरण, ईंधन वाउचर प्रबंधन और प्रदूषण में कमी की निगरानी की जाएगी।

स्वच्छ हवा और आधुनिक परिवहन की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है। साथ ही यह पहल स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने और देश के हरित विकास लक्ष्यों को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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