छत्तीसगढ़ : बिलासपुर जिले में एक अत्यंत संवेदनशील मामले में लापरवाही सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। यह घटना Bilaspur के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र से जुड़ी है, जहां दो मासूम बच्चियों के साथ हुए दुष्कर्म के मामले की जांच में गंभीर अनदेखी पाए जाने पर थाना प्रभारी और जांच अधिकारी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया गया है।

थाना प्रभारी और जांच अधिकारी पर कार्रवाई, रक्षित केंद्र में भेजा गया

लापरवाही के आरोप सामने आने के बाद सिरगिट्टी थाना प्रभारी निरीक्षक अभय सिंह बैस और उपनिरीक्षक संतोषी अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटाकर रक्षित केंद्र में भेज दिया गया है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर की गई है।

नई जिम्मेदारी तय, दो थानों में बदले गए प्रभारी अधिकारी

जिला विशेष शाखा में पदस्थ निरीक्षक वायपी सिंह को सिरगिट्टी थाना की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं पचपेड़ी थाना का प्रभार निरीक्षक कमला पुसाम को दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने इस संबंध में आदेश जारी कर तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

सात दिन में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के आदेश

जारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकरण की जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई है। सिरगिट्टी थाना में दर्ज नाबालिग से जुड़े दुष्कर्म मामले में थाना प्रभारी पर आरोप है कि उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण नहीं किया।साथ ही गंभीर अपराधों में आवश्यक मानी जाने वाली विशेष अपराध स्थल जांच इकाई को मौके पर नहीं बुलाया गया, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने सिविल लाइन क्षेत्र के पुलिस उपाधीक्षक को सात दिनों के भीतर विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

घटना का स्वरूप: मासूमों को बहलाकर किया गया जघन्य अपराध

यह मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र का है, जहां एक किशोर द्वारा चॉकलेट देने के बहाने सात वर्ष की दो मासूम बच्चियों के साथ जघन्य अपराध किया गया। आरोप है कि पीड़िताओं के साथ मारपीट की गई और उन्हें रस्सी से बांध दिया गया। बाद में जब परिजन उसे पकड़ने पहुंचे तो वह मौके से भाग निकला।

जांच में गंभीर चूक उजागर, अपराध स्थल पर आवश्यक प्रक्रिया नहीं अपनाई गई

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि गंभीर अपराध की सूचना मिलने के बाद भी थाना प्रभारी द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण नहीं किया गया। इसके अलावा आवश्यक साक्ष्य संकलन में भी अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।विशेष रूप से यह पाया गया कि निर्धारित प्रावधानों के अनुसार बुलाए जाने वाली अपराध स्थल जांच इकाई को मौके पर नहीं बुलाया गया, जिसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना गया है।

प्रशासन का सख्त संदेश: संवेदनशील मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं

इस कार्रवाई के बाद पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि नाबालिगों से जुड़े गंभीर मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। पूरे प्रकरण की जांच अब तेज कर दी गई है और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया जारी है।

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