अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद स्थित कालूपुर रेलवे स्टेशन को देश के आधुनिक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रियों को एक ही परिसर में बुलेट ट्रेन, भारतीय रेलवे और मेट्रो की सुविधा मिलेगी। स्टेशन का पुनर्विकास कार्य तेजी से चल रहा है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस योजना की खासियत यह है कि तीनों परिवहन व्यवस्थाओं को अलग-अलग स्तरों पर विकसित किया जा रहा है। सबसे ऊपरी हिस्से में बुलेट ट्रेन स्टेशन, उसके नीचे सामान्य रेलगाड़ियों के प्लेटफॉर्म और सबसे निचले स्तर पर मेट्रो स्टेशन होगा।
बुलेट ट्रेन स्टेशन का मुख्य ढांचा तैयार, अब बिछेंगी पटरियां
कालूपुर में बन रहे बुलेट ट्रेन स्टेशन का ऊपरी ढांचा लगभग तैयार हो चुका है। अब अगले चरण में ट्रैक बिछाने का काम किया जाएगा। इसके साथ ही बुलेट ट्रेन स्टेशन को मेट्रो और मौजूदा रेलवे स्टेशन से जोड़ने के लिए कनेक्टिविटी का काम भी आगे बढ़ रहा है।
रेलवे के डिविजनल मैनेजर (डीआरएम) वेद प्रकाश ने निर्माण कार्य की जानकारी देते हुए बताया कि स्टेशन के अलग-अलग हिस्सों में कई चरणों में काम किया जा रहा है। दक्षिणी हिस्से में मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब तैयार हो चुका है, जबकि उत्तरी हिस्से में निर्माण कार्य जारी है।
तीन स्तरों पर विकसित होगा परिवहन का पूरा नेटवर्क
कालूपुर स्टेशन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी एकीकृत परिवहन व्यवस्था होगी। इस परिसर में यात्रियों को ट्रेन बदलने या मेट्रो तक पहुंचने के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा।
डीआरएम वेद प्रकाश के अनुसार, बुलेट ट्रेन स्टेशन का ऊपरी हिस्सा यात्रियों की सुविधाओं के लिए विकसित किया जा रहा है। दक्षिण दिशा में पहली मंजिल पर होल्डिंग एरिया यानी प्रतीक्षा क्षेत्र बनाया गया है।
इसके ठीक नीचे भारतीय रेलवे के प्लेटफॉर्म नंबर 10, 11 और 12 स्थित है। सबसे निचले स्तर पर मेट्रो स्टेशन की सुविधा होगी। यात्रियों की आवाजाही को सरल बनाने के लिए लिफ्ट, सीढ़ियां और एस्केलेटर की व्यवस्था की जा रही है।
बुलेट ट्रेन से उतरते ही मेट्रो और दूसरी ट्रेनों तक पहुंचना होगा आसान
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन से अहमदाबाद पहुंचने वाले यात्रियों को शहर के दूसरे हिस्सों में जाने के लिए अलग से परिवहन तलाशने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे स्टेशन परिसर से ही मेट्रो या अन्य उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल कर सकेंगे।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, बुलेट ट्रेन स्टेशन और मेट्रो के बीच संपर्क स्थापित करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार है। वहीं मौजूदा रेलवे प्लेटफॉर्म से भी यात्रियों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
दक्षिणी मल्टीमॉडल हब तैयार, उत्तरी हिस्से में निर्माण जारी
कालूपुर स्टेशन के दक्षिणी हिस्से में मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब का निर्माण पूरा हो चुका है। डीआरएम के मुताबिक, इस इमारत में 16 मंजिलें है और निचले दो स्तरों को शामिल करने पर कुल 18 स्तर तैयार किए गए है।
यह परिसर केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें कार्यालयों के साथ आम लोगों और यात्रियों की जरूरतों से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जा रही है। इसके पूरा होने पर यह स्टेशन परिसर का एक बड़ा सुविधा केंद्र बनेगा।
वहीं उत्तरी हिस्से में पुराने स्टेशन के ढांचे को हटाकर नए निर्माण के लिए जगह तैयार कर ली गई है। इस क्षेत्र में भी मल्टीमॉडल हब का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। दोनों तरफ सुविधाएं विकसित करने का उद्देश्य यात्रियों की भीड़ को बेहतर तरीके से संभालना और स्टेशन से शहर तक पहुंच आसान बनाना है।
18 एकड़ में बनेगा रूफ प्लाजा और कॉनकोर्स
स्टेशन के पुनर्विकास में रूफ प्लाजा और कॉनकोर्स का निर्माण भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। डीआरएम वेद प्रकाश ने जानकारी दी कि परियोजना में 18 एकड़ का रूफ प्लाजा और 18 एकड़ का कॉनकोर्स या मेजेनाइन क्षेत्र शामिल है।
इन सुविधाओं के विकसित होने से स्टेशन को आधुनिक स्वरूप मिलेगा और यात्रियों के लिए आवाजाही तथा प्रतीक्षा की बेहतर व्यवस्था तैयार होगी।
2028 तक पूरा करने का लक्ष्य, मौजूदा ट्रेनों का संचालन भी रहेगा जारी
कालूपुर स्टेशन का पूरा विकास कार्य इस तरह किया जा रहा है कि सामान्य रेलगाड़ियों का संचालन प्रभावित न हो। मौजूदा रेलवे सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए बुलेट ट्रेन स्टेशन और अन्य परिवहन ढांचे का निर्माण अलग-अलग चरणों में किया जा रहा है।
बुलेट ट्रेन स्टेशन के निर्माण को लेकर मार्च 2027 और अगस्त 2027 की तारीखों का भी उल्लेख किया गया है, लेकिन इन दोनों समयसीमाओं का अलग-अलग उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। इसलिए स्टेशन के पूरी तरह तैयार होने या बुलेट ट्रेन सेवा शुरू होने की निश्चित तारीख की पुष्टि संबंधित परियोजना प्राधिकरण से होना जरूरी है।
कुल मिलाकर, कालूपुर स्टेशन का पुनर्विकास अहमदाबाद की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। परियोजना पूरी होने पर रेलवे, मेट्रो और बुलेट ट्रेन के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और यात्रियों को एक ही स्थान पर कई परिवहन विकल्प उपलब्ध होंगे।










