
रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था में इस बार अहम बदलाव किया गया है। अब सभी किसानों को पहले की तरह तीन टोकन जारी नहीं किए जाएंगे। शासन ने टोकन की संख्या को किसानों के पंजीकृत कृषि रकबे से जोड़ दिया है। इसके तहत किसान के पास जितनी जमीन होगी, उसी के आधार पर उसे धान बेचने के लिए टोकन मिलेंगे।
किसानों के लिए तय की गई टोकन की नई व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग रकबे वाले किसानों के लिए टोकन की संख्या निर्धारित की गई है।
- दो एकड़ से कम जमीन: एक टोकन।
- दो से 10 एकड़ तक जमीन: दो टोकन।
- 10 एकड़ से अधिक जमीन: अधिकतम तीन टोकन।
इस बदलाव के बाद किसानों को अपनी उपज बेचने की योजना टोकन की निर्धारित संख्या के अनुसार बनानी होगी। पहले किसान तीन अलग-अलग टोकन के आधार पर अपनी सुविधा से धान बिक्री की तारीख तय कर सकते थे। अब यह सुविधा उनके कृषि रकबे के अनुसार सीमित होगी।
छोटे किसानों को एक ही टोकन में बेचनी होगी उपज
नए नियम का सबसे सीधा असर लघु और सीमांत किसानों पर पड़ेगा। दो एकड़ से कम जमीन वाले किसानों को केवल एक टोकन मिलेगा। ऐसे में उन्हें अपनी धान उपज की बिक्री उसी टोकन के तहत करने की तैयारी रखनी होगी। वहीं, दो से 10 एकड़ तक खेती करने वाले किसानों को दो और 10 एकड़ से अधिक रकबा रखने वालों को अधिकतम तीन टोकन मिल सकेंगे।
टोकन कटवाने से पहले पंजीकृत रकबे की जांच जरूरी
धान खरीदी की तैयारी कर रहे किसानों के लिए अब पंजीयन में दर्ज जमीन का विवरण महत्वपूर्ण हो गया है। यदि वास्तविक कृषि रकबे और पंजीकृत रिकॉर्ड में अंतर है, तो टोकन की श्रेणी तय होने में परेशानी आ सकती है।इसलिए किसानों को टोकन लेने से पहले अपने पंजीकृत रकबे और भूमि संबंधी दस्तावेजों का मिलान कर लेना चाहिए। साथ ही खरीदी केंद्र पहुंचने से पहले अपनी श्रेणी के अनुसार मिलने वाले टोकन की संख्या की जानकारी भी हासिल कर लेनी चाहिए।











