नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश के 28 राज्यों को बड़ी वित्तीय सहायता देते हुए 1,09,019 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कर हस्तांतरण राशि जारी की है। यह राशि 31 अक्टूबर 2026 को राज्यों के खाते में हस्तांतरित की गई। खास बात यह है कि यह नियमित मासिक कर हस्तांतरण के अतिरिक्त है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार की ओर से जारी की गई यह दूसरी अतिरिक्त किस्त है।

केंद्र सरकार ने आगामी त्योहारों के मौसम को देखते हुए यह अग्रिम राशि जारी की है। इसका उद्देश्य राज्य सरकारों को पूंजीगत व्यय में तेजी लाने के साथ विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराना है। इससे राज्यों को बुनियादी सुविधाओं के विकास, निर्माण कार्यों और जनहित से जुड़ी योजनाओं के वित्तपोषण में मदद मिलेगी।

छत्तीसगढ़ को मिले 3,602 करोड़ रुपये

जारी की गई राशि में छत्तीसगढ़ को 3,602 करोड़ रुपये मिले हैं। वहीं पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के खाते में 8,010 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। झारखंड को 3,660 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं।राज्यों को जारी राशि में उत्तर प्रदेश 19,208 करोड़ रुपये के साथ पहले स्थान पर है। बिहार को 10,845 करोड़, मध्य प्रदेश को 8,010 करोड़, पश्चिम बंगाल को 7,866 करोड़ और महाराष्ट्र को 7,022 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

किस राज्य को कितनी मिली राशि?

केंद्र सरकार की ओर से जारी राज्यवार कर हस्तांतरण का विवरण इस प्रकार है।

राज्य     राशि (करोड़ रुपये)
आंध्र प्रदेश  4,597     
अरुणाचल प्रदेश 1,476   
असम    3,552  
बिहार    10,845     
छत्तीसगढ़   3,602    
गोवा   398 

गुजरात    4,094   
हरियाणा   1,484     

हिमाचल प्रदेश   996          
झारखंड         3,660     
कर्नाटक       4,504 

केरल       2,597       
मध्य प्रदेश   8,010             
महाराष्ट्र    7,022             
मणिपुर       682               
मेघालय       688               
मिजोरम       615              
नगालैंड       524  

ओडिशा         4,819           
पंजाब       2,176            
राजस्थान     6,460             
सिक्किम       365               
तमिलनाडु      4,466             
तेलंगाना       2,370            
त्रिपुरा       699               
उत्तर प्रदेश   19,208           
उत्तराखंड    1,244           
पश्चिम बंगाल  7,866            

केंद्र सरकार की इस अतिरिक्त वित्तीय सहायता से राज्यों को चालू वित्त वर्ष में विकास और कल्याणकारी गतिविधियों के लिए खर्च की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

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