जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सागर जिले के बीना पोस्ट ऑफिस में हुए 36.4 लाख रुपये के फर्जी नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) और टर्म डिपॉजिट घोटाले में निवेशकों के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने डाक विभाग की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें ग्राहकों की लापरवाही का हवाला देकर विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की थी। कोर्ट ने प्रभावित निवेशकों के दावों पर तय समयसीमा में कार्रवाई करने के निर्देश दिए है।

फर्जी NSC और टर्म डिपॉजिट के नाम पर हुई थी धोखाधड़ी

यह मामला बीना पोस्ट ऑफिस में करीब 36.4 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। निवेशकों ने नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट और टर्म डिपॉजिट योजनाओं में अपनी रकम जमा कराई थी। उन्हें उम्मीद थी कि तय अवधि पूरी होने पर ब्याज सहित पैसा वापस मिलेगा।लेकिन बाद में पता चला कि निवेशकों को दिए गए पासबुक और अन्य दस्तावेज फर्जी थे। उनके नाम पर वास्तविक खाते खोले ही नही गए थे। इस खुलासे के बाद प्रभावित लोगों को अपनी जमा पूंजी वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

15 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर एस. भट्टी ने 15 अक्टूबर 2026 को मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए निवेशकों को राहत दी। अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि निवेशकों से रकम लेने वाले लोग डाक विभाग के कर्मचारी थे।डाक विभाग ने बचाव में कहा था कि संबंधित कर्मचारी उस समय बीना पोस्ट ऑफिस में अधिकृत रूप से पदस्थ नही थे। विभाग के मुताबिक, ग्राहकों को केवल अधिकृत काउंटर कर्मचारियों के माध्यम से ही लेनदेन करना चाहिए था।हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नही किया। कोर्ट ने माना कि आम ग्राहक से यह उम्मीद करना उचित नही है कि वह डाकघर में मौजूद कर्मचारी की आंतरिक पदस्थापना या तबादले से जुड़ी जानकारी रखे।

फर्जी पासबुक देकर निवेशकों से ली गई थी रकम

मामले के विवरण के अनुसार, निवेशक बीना पोस्ट ऑफिस में टर्म डिपॉजिट खाते खुलवाने और NSC खरीदने पहुंचे थे। इसी दौरान डाक विभाग के कुछ कर्मचारियों ने उनसे संपर्क कर निवेश प्रक्रिया में मदद करने की बात कही।आरोप है कि कर्मचारियों ने निवेशकों से पैसे लेकर उन्हें पासबुक और दूसरे दस्तावेज दिए। बाद में जांच में सामने आया कि दस्तावेज फर्जी थे और निवेशकों के नाम पर वास्तविक खाते नहीं खोले गए थे। मामले में संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हुई। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें गिरफ्तार किया गया और बाद में अदालत ने दोषी भी ठहराया।

ग्राहकों की लापरवाही बताकर विभाग ने खारिज किए थे दावे

धोखाधड़ी का पता चलने के बाद निवेशकों ने डाक विभाग से अपनी रकम वापस मांगी। लेकिन विभाग ने यह कहते हुए दावों को स्वीकार नही किया कि पैसा लेने वाले कर्मचारी उस समय बीना शाखा में तैनात नही थे।निवेशकों का पक्ष था कि रकम लेने वाले लोग डाक विभाग के कर्मचारी थे और डाकघर में ही उनसे लेनदेन हुआ था। ऐसे में सामान्य ग्राहक के लिए उनकी वास्तविक पदस्थापना की जानकारी रखना संभव नही था।हाईकोर्ट ने निवेशकों की इस दलील को महत्व देते हुए स्पष्ट किया कि सद्भावना से किए गए लेनदेन के दावों को केवल कर्मचारी की पदस्थापना के आधार पर खारिज नही किया जा सकता।

30 कार्य दिवस में दावा, 90 दिन के भीतर निपटारे का निर्देश

हाईकोर्ट ने डाक विभाग के 27 मई 2021 के परिपत्र का हवाला देते हुए प्रभावित निवेशकों के दावों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

अदालत के निर्देश के मुताबिक:

  • प्रभावित निवेशकों को निर्धारित प्रारूप में 30 कार्य दिवस के भीतर दावा आवेदन देना होगा।
  • आवेदन मिलने के बाद सक्षम अधिकारी को 90 दिनों के भीतर दावे का निपटारा करना होगा।
  • निवेशक लागू नियमों के अनुसार फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज के भी हकदार होंगे।

हालांकि, इस आदेश का मतलब यह नही है कि सभी निवेशकों को तत्काल रकम मिल चुकी है। पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके दावों की जांच और निपटारा किया जाएगा।

पोस्ट ऑफिस में निवेश करने वालों के लिए क्यों अहम है फैसला?

हाईकोर्ट का यह निर्णय सरकारी बचत योजनाओं में पैसा लगाने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। आमतौर पर निवेशक डाकघर में मौजूद कर्मचारियों पर भरोसा करके अपनी रकम जमा करते है। इस मामले में अदालत ने ग्राहकों की सद्भावना और डाक विभाग से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका को अहम माना है।

हालांकि, फैसले का यह अर्थ नही है कि हर तरह की धोखाधड़ी में डाक विभाग बिना जांच के भुगतान करने के लिए बाध्य होगा। प्रत्येक मामले में दस्तावेजों, परिस्थितियों और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

निवेश करते समय इन बातों का रखें ध्यान

पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं में निवेश करते समय कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है।

  • रकम हमेशा अधिकृत काउंटर या निर्धारित डिजिटल माध्यम से जमा करें।
  • जमा राशि की रसीद और पासबुक सुरक्षित रखें।
  • खाता संख्या और निवेश का विवरण विभाग के रिकॉर्ड से मिलाएं।
  • यह सुनिश्चित करें कि जमा की गई रकम वास्तव में आपके खाते में दर्ज हुई है।
  • दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने पर तुरंत लिखित शिकायत दर्ज कराएं और उसकी प्राप्ति का प्रमाण संभालकर रखें।
  • बीना पोस्ट ऑफिस घोटाले में हाईकोर्ट के फैसले से प्रभावित निवेशकों को अपनी रकम और लागू ब्याज का दावा करने का रास्ता मिला है। साथ ही इस निर्णय ने डाक विभाग की जवाबदेही और सरकारी बचत योजनाओं में ग्राहकों के भरोसे से जुड़े सवालों को भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

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