
सूरत। गुजरात के सूरत में बिना मान्य मेडिकल डिग्री के एलोपैथिक पद्धति से मरीजों का इलाज करने वाले फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सचिन पुलिस और जिला पंचायत के स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने तीन अलग-अलग क्लीनिकों पर छापेमारी कर तीन लोगों को पकड़ा है। कार्रवाई के दौरान 71,220 रुपये की दवाइयां, इंजेक्शन, सिरप और इलाज में इस्तेमाल होने वाले चिकित्सा उपकरण जब्त किए गए हैं।पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वांझ गांव सहित सचिन क्षेत्र में यह अभियान चलाया। जांच में सामने आया कि आरोपी आवश्यक चिकित्सा योग्यता के बिना क्लीनिक संचालित कर मरीजों को एलोपैथिक दवाइयां दे रहे थे।
पहला आरोपी पहले भी फर्जी डॉक्टर के मामले में पकड़ा जा चुका है
पुलिस की कार्रवाई में सबसे पहले अरुणकांति प्रफुल्लकुमार विश्वास (50) को पकड़ा गया। वह आकाश कॉम्प्लेक्स में हरि गुरूचंद के नाम से क्लीनिक संचालित कर रहा था। जांच में पता चला कि आरोपी केवल 12वीं पास है। इतना ही नहीं, वर्ष 2008 में भी उसके खिलाफ फर्जी डॉक्टर के रूप में काम करने का मामला दर्ज हो चुका है।
दूसरे क्लीनिक से भी मिला संदिग्ध चिकित्सा कारोबार
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने चंद्रेश कुमार गोलनाथ प्रजापति (37) को भी पकड़ा। वह मानविक नाम से क्लीनिक चला रहा था। आरोपी ने बीएएमएस की पढ़ाई की थी। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम उसके क्लीनिक में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों और चिकित्सा सामग्री की जांच कर रही है।
12वीं पास युवक चला रहा था तीसरा क्लीनिक
तीसरा आरोपी सुशांत तपस बिश्वास (31) है। वह सचिन के साईनाथ सुडा सेक्टर-3 में बड़ी मां लक्ष्मी नाम से क्लीनिक संचालित कर रहा था। जांच के दौरान सामने आया कि वह भी केवल 12वीं पास है और मरीजों का इलाज कर रहा था।
झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ लगातार दूसरे दिन कार्रवाई
सूरत में अवैध रूप से चिकित्सा गतिविधियां संचालित करने वालों के खिलाफ पुलिस ने लगातार दूसरे दिन अभियान चलाया है। इससे पहले एसओजी की टीम ने शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए 9 फर्जी डॉक्टरों को पकड़ा था।वहीं दूसरे दिन की कार्रवाई में 13 लोगों के खिलाफ कदम उठाए गए। लगातार हो रही इस कार्रवाई से बिना जरूरी चिकित्सा योग्यता के क्लीनिक चलाने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य ऐसे लोगों पर शिकंजा कसना है, जो बिना उचित योग्यता के मरीजों की जान जोखिम में डालकर इलाज कर रहे हैं।











