
भोपाल। मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश के 102 होनहार छात्र-छात्राओं को भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति से सम्मानित किया जाएगा। 1 नवंबर को आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चयनित विद्यार्थियों को एक-एक लाख रुपये की छात्रवृत्ति और प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे। इस योजना के तहत कुल एक करोड़ दो लाख रुपये की राशि वितरित की जाएगी।
ऑनलाइन प्रतियोगिता के जरिए हुआ विद्यार्थियों का चयन
भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना की घोषणा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जन्माष्टमी के अवसर पर की थी। इसके बाद संस्कृति विभाग के अंतर्गत श्रीकृष्ण पाथेय न्यास ने विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगिता आयोजित की। इसमें स्कूलों और कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग वर्ग बनाए गए थे।
प्रतियोगिता ऑनलाइन कराई गई थी। न्यास की ओर से विजेताओं की सूची जारी कर दी गई है। चयन प्रक्रिया में लॉटरी प्रणाली अपनाई गई, जिसके आधार पर 102 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के लिए चुना गया।
63 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों ने कराया था पंजीयन
इस योजना के तहत आयोजित प्रतियोगिता में कुल 63,736 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था। इनमें से 58,099 विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में भाग लिया। इसके बाद विजेताओं का चयन किया गया।
प्रदेश के कई जिलों के विद्यार्थियों को इस छात्रवृत्ति के लिए चुना गया है। इनमें खंडवा, अशोकनगर, बड़वानी, नर्मदापुरम, सिवनी, सिंगरौली, उमरिया, बुरहानपुर, छतरपुर, गुना, झाबुआ, कटनी, मऊगंज, सागर, सतना, श्योपुर और उज्जैन शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खंडवा जिले से सबसे ज्यादा छह विद्यार्थियों का चयन हुआ है।
वेबसाइट पर देख सकते हैं विजेताओं की सूची
छात्रवृत्ति के लिए चयनित विद्यार्थियों के नाम श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए गए हैं। विद्यार्थी और अभिभावक सूची देखने के लिए https://shrikrishnapatheynyas.com/ पर जा सकते हैं।
भारतीय संस्कृति और श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन से जोड़ना है उद्देश्य
भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन से परिचित कराना है। योजना के माध्यम से बच्चों को श्रीकृष्ण की शिक्षाओं, विद्याओं और कलाओं के महत्व को समझने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सरकार की इस पहल का लक्ष्य विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और श्रीकृष्ण के विचारों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना है।




















