मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की चर्चाओं को खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया पर उनके पाला बदलने को लेकर किए जा रहे दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी पोस्ट पर अधिक ध्यान खींचने के लिए मनगढ़ंत कहानियां फैलाते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग झूठी खबरों के जरिए कमाई करने की कोशिश करते हैं।

सोशल मीडिया पर अफवाहों का दिया जवाब

प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर चल रही चर्चाओं पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल कर अपनी ओर से कहानियां जोड़ देते हैं, ताकि उनकी पोस्ट पर ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिल सकें।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वह किसी की रोजी-रोटी छीनना नहीं चाहतीं। साथ ही उन्होंने बताया कि अपने बारे में फैलाई जा रही खबरों पर वह लंबे समय से चुप थीं, लेकिन उनकी खामोशी को गलत तरीके से समझा गया। उनकी प्रतिक्रिया को भाजपा में शामिल होने के दावों का स्पष्ट खंडन माना जा रहा है।

राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद शुरू हुई चर्चा

प्रियंका चतुर्वेदी का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने और दोबारा उच्च सदन में मौका नहीं मिलने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुई थीं। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि वह पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं और भाजपा के संपर्क में हैं। हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया।

मार्च 2026 में शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा था कि राजनीतिक परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने के कारण प्रियंका चतुर्वेदी को दोबारा राज्यसभा भेजना संभव नहीं हो सका। उनके मुताबिक, परिस्थितियां अलग होतीं तो उनकी उम्मीदवारी पर विचार किया जा सकता था।

कांग्रेस से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर

प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वह पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में सक्रिय रहीं। वर्ष 2019 में कांग्रेस छोड़कर उन्होंने अविभाजित शिवसेना का दामन थाम लिया था। उस समय कांग्रेस के भीतर कुछ घटनाओं और फैसलों को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई थी।

शिवसेना में शामिल होने के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया। पार्टी के विभाजन के बाद भी वह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना यूबीटी गुट के साथ बनी रहीं और विभिन्न राष्ट्रीय तथा राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखती रहीं।

शिवसेना के भीतर टूट की अटकलों के बीच बयान

महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन के बाद से नेताओं के पाला बदलने को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट और उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी है।

जून 2026 में शिवसेना यूबीटी के कुछ सांसदों के शिंदे गुट में जाने की अटकलें भी सामने आई थीं। उस समय संजय राउत ने इन दावों को खारिज करते हुए पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया था। ऐसे माहौल में प्रियंका चतुर्वेदी के भाजपा में जाने की चर्चा ने भी राजनीतिक ध्यान खींचा। हालांकि, उन्होंने खुद इन अटकलों को नकार दिया है।

संजय राउत के साथ सार्वजनिक मतभेद भी चर्चा में

20 अक्टूबर 2026 को प्रियंका चतुर्वेदी और संजय राउत के बीच अल्बानिया में हिंसक प्रदर्शनों से जुड़े एक बयान को लेकर सार्वजनिक असहमति सामने आई थी। चतुर्वेदी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ हिंसा को उचित ठहराने से इनकार किया था।

हालांकि, किसी राजनीतिक मुद्दे पर अलग राय रखना अपने आप में पार्टी छोड़ने या दूसरी पार्टी में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। दोनों नेताओं के बीच सामने आए मतभेदों से उनके दल बदलने के दावों की पुष्टि नहीं होती।

फिलहाल दूसरी पार्टी में जाने की घोषणा नहीं

प्रियंका चतुर्वेदी राष्ट्रीय राजनीति, महिला अधिकारों और लोकतांत्रिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं। राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनकी अगली राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं, लेकिन भाजपा में शामिल होने की खबरों को उन्होंने खारिज किया है।

फिलहाल उनकी ओर से किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों और पुष्ट जानकारी के बीच अंतर करना जरूरी है।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!