उज्जैन। बाबा महाकाल के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुंचाने वाली रोप-वे परियोजना में देरी हो रही है। निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार के चलते पुराने टेंडर को निरस्त कर दिया गया है और अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए नए सिरे से टेंडर जारी किया गया है। इसके साथ ही प्रोजेक्ट की लागत भी 190 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 258 करोड़ रुपये कर दी गई है। इस बदलाव से परियोजना को पूरा करने की समयसीमा पर भी असर पड़ने की आशंका है।

190 करोड़ से बढ़कर 258 करोड़ रुपये हुई लागत

महाकाल रोप-वे परियोजना की जिम्मेदारी नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड यानी एनएचएलएमएल के पास है। पहले इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 190 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 258 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

पहले निर्माण का ठेका ओडिशा की एमएस इंफ्रा इंजीनियर कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया था। हालांकि, काम की प्रगति संतोषजनक नहीं रहने के कारण पुराना टेंडर निरस्त कर दिया गया। अब परियोजना को दोबारा गति देने के लिए नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई है।

दो साल में 2 फीसदी भी काम पूरा नहीं हुआ

महाकाल रोप-वे का टेंडर करीब दो साल पहले जारी किया गया था। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी निर्धारित प्रगति हासिल नहीं कर सकी और परियोजना का 2 फीसदी काम भी पूरा नहीं हो पाया।

बताया गया है कि ठेकेदार कंपनी और विभागीय अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी के साथ जरूरी दस्तावेजी प्रक्रियाओं में देरी भी काम प्रभावित होने की वजह बनी। अब नए टेंडर के जरिए निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की तैयारी है। हालांकि, नई एजेंसी के चयन और निर्माण शुरू होने के बाद ही परियोजना की वास्तविक रफ्तार स्पष्ट हो सकेगी।

क्या है महाकाल रोप-वे परियोजना?

उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन से महाकालेश्वर मंदिर तक पहुंचने में सुविधा देने के उद्देश्य से यह परियोजना तैयार की गई है। रोप-वे शुरू होने के बाद यात्रियों को सड़क मार्ग पर लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। इससे यात्रा का समय कम करने और मंदिर तक पहुंचने की व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

1.76 किलोमीटर के मार्ग पर बनेंगे तीन स्टेशन

प्रस्तावित रोप-वे की कुल लंबाई 1.76 किलोमीटर होगी। इसका मार्ग उज्जैन रेलवे स्टेशन से शुरू होकर नूतन स्कूल के रास्ते महाकाल मंदिर के प्रशासक कार्यालय तक पहुंचेगा।

इस रूट पर तीन स्टेशन प्रस्तावित हैं:

  • पहला स्टेशन: माल गोदाम और रेलवे स्टेशन क्षेत्र
  • दूसरा स्टेशन: त्रिवेणी
  • तीसरा स्टेशन: चारधाम मंदिर

इस परियोजना का उद्देश्य रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

2026 में शुरू होने की योजना पर देरी का असर

महाकाल रोप-वे परियोजना को 2026 से आगे बढ़ाने की योजना थी, लेकिन निर्माण में देरी और टेंडर निरस्त होने के बाद तय समय पर इसे पूरा करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर नए टेंडर की प्रक्रिया, निर्माण एजेंसी के चयन और काम दोबारा शुरू होने पर है।

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