रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा जिले के दो युवकों के साथ गुजरात में कथित मारपीट और बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया है। दोनों युवक गुजरात के कांडला पोर्ट स्थित अरिहंत एग्रो कंपनी में काम करते थे। पीड़ित नितेश तिवारी और सच्चिदानंद उपाध्याय का आरोप है कि कंपनी मालिक ने उन्हें करीब 8 दिनों तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान चार दिनों तक लाठी-डंडों और सरिया से उनकी पिटाई की गई।

मामले की जानकारी मिलने के बाद रीवा में रहने वाले परिजनों ने प्रशासन से मदद मांगी। शिकायत के बाद रीवा प्रशासन और पुलिस ने गुजरात के संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। इसके बाद दोनों कर्मचारियों को वहां से मुक्त कराकर रीवा वापस लाया गया।

काम को लेकर विवाद के बाद बिगड़े हालात

जानकारी के मुताबिक, नितेश तिवारी और सच्चिदानंद उपाध्याय पिछले करीब ढाई साल से गुजरात की अरिहंत एग्रो कंपनी में काम कर रहे थे। पीड़ितों का कहना है कि उनसे दबाव बनाकर ऐसा काम कराया जा रहा था, जिसे करने में वे असमर्थ थे।

दोनों ने इस स्थिति की जानकारी रीवा में रहने वाले अपने भाइयों को दी थी। आरोप है कि इसकी भनक कंपनी मालिक धीर पारिक को लगने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें कंपनी परिसर में रोक लिया गया।

चार दिनों तक मारपीट करने का आरोप

पीड़ित कर्मचारियों के अनुसार, उन्हें करीब आठ दिनों तक बंधन में रखा गया। इस दौरान कंपनी में तैनात बॉडीगार्डों पर भी मारपीट में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। दोनों का दावा है कि उनके साथ चार दिनों तक लाठी-डंडों और सरिया से मारपीट की गई, जिससे वे घायल हो गए।

हालांकि, घटना से जुड़े सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

परिजनों की शिकायत पर हरकत में आया प्रशासन

रीवा में मौजूद परिजनों को जब कथित घटना की जानकारी मिली तो वे मदद के लिए कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। वहां शिकायत देकर दोनों कर्मचारियों को सुरक्षित वापस लाने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।

इसके बाद रीवा प्रशासन और पुलिस ने गुजरात के संबंधित अधिकारियों से संपर्क साधा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों कर्मचारियों को मुक्त कराकर रीवा लाया गया।

एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई की मांग

रीवा लौटने के बाद दोनों कर्मचारियों ने कंपनी मालिक और मारपीट में शामिल बताए जा रहे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पीड़ित पक्ष चाहता है कि मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच और पुलिस की आगे की कार्रवाई अहम होगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।

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